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Yogi Adityanath ने लखनऊ में ‘रश्मिरथी पर्व’ का किया शुभारंभ, सांस्कृतिक चेतना पर जोर

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘रश्मिरथी पर्व’ का शुभारंभ मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने किया। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रकवि Ramdhari Singh Dinkar की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ को भारतीय समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया और कहा कि यह रचना आज भी सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने का काम करती है।

साहित्य के जरिए समाज को जोड़ने का संदेश

कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया गया, जहां तीन दिवसीय इस सांस्कृतिक पर्व की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ‘रश्मिरथी’ केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक विचार है। उन्होंने कहा कि दिनकर जी की रचनाएं आज भी युवाओं को प्रेरित करती हैं और उन्हें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाती हैं।

मुख्यमंत्री ने इस दौरान प्रसिद्ध पंक्ति “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” का भी उल्लेख किया और बताया कि यह पंक्ति जनशक्ति और लोकतंत्र की ताकत को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और ‘रश्मिरथी’ जैसे ग्रंथ हमें अपने इतिहास और मूल्यों से जोड़ते हैं।

सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा

कार्यक्रम में ‘रश्मिरथी से संवाद’ नामक स्मारिका का भी विमोचन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य और संस्कृति के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है और वे भारतीय परंपराओं को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।

जातिवाद और विभाजन पर प्रहार

अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने समाज में फैल रहे जातिवाद और विभाजनकारी सोच पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दिनकर जी की रचनाएं हमें सिखाती हैं कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्म से होती है, न कि उसकी जाति से।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समाज को बांटने वाली ताकतों से सावधान रहें और एकता व भाईचारे को मजबूत करें। उनका मानना है कि जब समाज एकजुट रहेगा, तभी देश तेजी से प्रगति कर सकेगा।

युवाओं के लिए प्रेरणा

मुख्यमंत्री ने युवाओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे साहित्य को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि किताबें केवल ज्ञान का स्रोत नहीं होतीं, बल्कि वे जीवन जीने की दिशा भी देती हैं।

‘रश्मिरथी’ जैसे ग्रंथ युवाओं को साहस, संघर्ष और नैतिक मूल्यों की सीख देते हैं, जो उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

भविष्य की दिशा

यह तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक व्यापक विचार आंदोलन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।

कुल मिलाकर, लखनऊ में आयोजित यह आयोजन साहित्य, संस्कृति और सामाजिक एकता का अनूठा संगम बनकर सामने आया, जिसमें Yogi Adityanath ने समाज को एकजुट रखने और भारतीय मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।