लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार को लगी भीषण आग ने कई परिवारों की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में भड़की आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और वहां मौजूद लोग धुएं व लपटों के बीच फंस गए. इस हादसे की सबसे दर्दनाक तस्वीर उस पिता की है, जिसने अपने बेटे की फोन पर आखिरी चीख सुनी—“पापा, मुझे बचा लीजिए…”
बेटे की आवाज सुनते ही वह बदहवास हालत में अलीगंज के लिए दौड़ पड़े, लेकिन जब तक पहुंचते, सबकुछ बर्बाद हो चुका था. आइए आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देते हैं.
सुखमणि सिंह ने पिता को किया फोन कहा “पापा, मुझे बचा लीजिए”
लखनऊ में जब कोचिंग में आग लगी तो सभी अपनी जान बचाने के लिए भागे, कुछ लोगों ने रस्सी बांधकर बाहर निकलने का प्रयास किया, वहीं कुछ लोगों ने छलांग लगा दी और अपनी जान बचाई, इस दौरान कुछ लोगों को काफी गंभीर चोट भी लगी है. आलम बाग के रहने वाले पारिजोत सिंह ने बताया कि उनके पास फोन आया था. उनका बेटा आग में फंसा था, उसने उन्हें फोन कर कहा कि “पापा, आग लग गई है..मुझे बचा लो..’ पारिजोत ने कहा कि
“बेटे की आवाज सुनकर उनके पैरों के नीचे से जमीन निकल गई और वो भागते हुए वहां पहुंचे लेकिन, पुलिसवालों ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया.”
23 साल के सुखमणि सिंह ने भी अपने पिता को फोन किया और कहा कि “पापा यहां आग लग गई हैं प्लीज मुझे बचा लीजिए..” पिता ने कहा उनके पास दोपहर करीब 2.15 बजे फोन आया था. सुखमणि ने कहा कि
“यहां ऑफिस में आग लग गई है, जिसके बाद वो तुरंत अलीगंज के लिए भागे, लेकिन समय से नहीं पहुंच सके.”
अब्दुल रहमान था अपने माता पिता का एकलौता सहारा
अग्निकांड हादसे में जान गंवाने वाले अब्दुल रहमान के दोस्त सद्दाम शेख ने बताया कि
“अब्दुल यहां किराये के घर में रहता था. उसके पिता पैरलाइज हैं और मां हाउस वाइफ हैं. अब्दुल घर का अकेला कमाऊ बेटा था. अभी 8-10 महीने पहले ही उसकी नौकरी लगी थी, जिसके बाद वो बहुत खुश था.”
दो बहनों की शादी हो चुकी हैं. बेटे की मौत के बाद माता-पिता का इकलौता सहारा चला गया है.
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