मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) पर जमीन खरीद को लेकर उठे सवालों के बीच अब समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) भी उनके समर्थन में उतर आए हैं। अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद को केवल जमीन या संपत्ति का मामला मानने से इनकार करते हुए इसे बीजेपी की अंदरूनी राजनीति से जोड़ दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मोहन यादव को बदनाम करने की साजिश रची जा रही है और इसके पीछे भाजपा की अपनी राजनीतिक रणनीति काम कर रही है। अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का कहना है कि बीजेपी सिर्फ मोहन यादव ही नहीं, बल्कि तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को बदलने की तैयारी में है, इसलिए इस तरह के आरोपों को हवा दी जा रही है।
कांग्रेस ने लगाया मोहन यादव पर आरोप
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मोहन यादव और उनके परिवार पर उज्जैन में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार और रिश्तेदारों ने विकास परियोजनाओं के आसपास बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी। इसी मुद्दे को लेकर सियासत तेज हो गई है और अब विपक्षी दल भी अपने-अपने तरीके से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
‘बीजेपी की अंदरूनी लड़ाई का हिस्सा है पूरा मामला’: Akhilesh Yadav
लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा कि भाजपा के भीतर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। उनके मुताबिक, पार्टी के अंदर सत्ता और नेतृत्व को लेकर खींचतान है, और इसी वजह से कुछ मुख्यमंत्रियों के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। अखिलेश ने दावा किया कि बीजेपी अब तक कई राज्यों में मुख्यमंत्री बदल चुकी है और आने वाले समय में कुछ और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि
“मोहन यादव के खिलाफ जिस तरह आरोपों को उछाला जा रहा है, उससे साफ लगता है कि यह केवल विपक्ष का हमला नहीं, बल्कि बीजेपी के अंदर की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।”
हालांकि, मोहन यादव पर लगे आरोपों को लेकर अभी तक किसी जांच एजेंसी की ओर से अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। लेकिन इस पूरे विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। एक तरफ कांग्रेस जमीन खरीद के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेर रही है, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेता मोहन यादव के समर्थन में उतरकर इस मामले को नया राजनीतिक मोड़ दे रहे हैं।
अब देखना होगा कि यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहता है या आने वाले दिनों में इससे भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर भी असर पड़ता है।
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