MUMBAI INDIANS SQUAD

IPL Player Trades Rules: इंडियन प्रीमियर लीग ( IPL 2024) के मिनी ऑक्शन में आईपीएल की कुल 10 फ्रैंचाइजी ने 72 खिलाड़ियों ने 230 करोड़ 45 लाख खर्च हुए हैं। लेकिन नीलामी के दूसरे दिन ही एक बार फिर आईपीएल ट्रांसफर विंडो खुल गई है। इसी ट्रांसफर विंडो ( Transfer Window ) के चलते ही आईपीएल मिनी ऑक्शन ( IPL Mini Auction) से पहले कुछ खिलाड़ियों दूसरी टीम का हाथ थामा, जिसमें हार्दिक पांड्या का नाम सबसे चर्चित रहा। साथ ही ट्रांसफर विंडो क्या है और इसके नियम क्या है, आइए जानते हैं…

क्या होता है खिलाड़ियों का ट्रेड और कैसे होता है?

आईपीएल ट्रांसफर विंडो का इंस्तेमाल करके एक प्लेयर अपनी वर्तमान टीम को छोड़कर दूसरी फ्रैंचाइजी का हाथ थाम सकता है। ये ट्रेड दो तरीके से होती है, पहली कैश डील और दूसरी डील में फ्रैंचाइजी अपने-अपने प्लेयर की अदला-बदली कर ले।

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ये ट्रांसफर विंडो कब से कब तक मौजूद रहती है?

आईपीएल के नियम की मानें, तो आईपीएल के किसी भी सीजन के खत्म होने के एक महीने के बाद ही ये विंडो खुल जाती है और ये अगले सीजन की नीलामी से एक हफ्ते पहले तक खुली रहती है। इसी के साथ ही आईपीएल ऑक्शन के बाद फिर ये विंडो खुलती है, जोकि अगले सीजन की शुरूआत से सिर्फ एक महीने पहले बंद हो जाती है।

कब से शुरू हुआ ये नियम?

ट्रांसफर विंडो या ट्रेडिंग विंडो साल 2009 में शुरू हुई थी और आईपीएल की पहली टेडिंग डील मुंबई इंडियंस और दिल्ली डेयरडेविल्स के बीच हुई थी। मुंबई इंडियंस ने आशीष नेहरा के बदले शिखर धवन को अपने साथ जोड़ा था।

क्या है एक तरफा ट्रेड?

जब कोई प्लेयर कैश डील के चलते एक टीम से दूसरी टीम में जाता है, तो इसे एकतरफा ट्रेड कहा जाता है। इसमें टीम बी को उसके बदले टीम ए को प्लेयर की कीमत देनी होगी, जो बेचने वाली टीम ने नीलामी के दौरान उस प्लेयर को खरीदने में चुकाई थी। हार्दिक पांड्या के लिए मुंबई इंडियंस ने गुजरात टाइटन्स को पांड्या के बराबर की फीस चुकाई है।

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दो तरफा ट्रेड क्या है?

दो तरफा ट्रेड में दो आईपीएल टीम के बीच में खिलाड़ियों की अदला-बदली होती है। लेकिन यहां पर दोनों खिलाड़ियों के बीच कीमत में अंतर वाली कीमत को खरीदने वाली टीम को चुकाना पड़ता है, इसे दो तरफा ट्रेड कहते हैं।

ट्रेड को लेकर खिलाड़ी के पास क्या होता है अधिकार?

गुजरात टाइटन्स के क्रिकेट डायरेक्टर विक्रम सोलंकी ने बताया था कि हार्दिक खुद ही मुंबई में वापसी चाहते थे। जिसके बाद ये ट्रेड हुआ था। साथ ही अगर कोई प्लेयर ट्रेड विंडो के तहत किसी दूसरी टीम में जाना चाहता हो और उसकी फ्रेंचाइजी इससे सहमत ना हो तो ये डील नहीं हो सकती।

ट्रेड के दौरान एक फ्रेंचाइजी दूसरी टीम को प्लेयर की फीस के अलावा कोई रकम देती है, तो उसे ट्रांसफर फीस कहते हैं। वैसे आपको जानकर हैरानी होगी कि कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से प्लेयर को ट्रांसफर फीस में कम से कम 50% तक हिस्सा मिल सकता है।

हालांकि इस मामले में भी खिलाड़ी और उसकी फ्रेंचाइजी के बीच आपसी सहमति के हिसाब से ये हिस्सा कम भी हो सकता है। ये भी जरूरी नहीं है कि प्लेयर को हिस्सा मिले ही, मुंबई और गुजरात के बीच डील में पंड्या को क्या फायदा हुआ या क्या ट्रांसफर फीस मिली है, इसका खुलासा भी नहीं हुआ है।

ट्रांसफर फीस का फ्रैंचाइजी के पर्स पर भी असर?

आईपीएल में ट्रांसफर फीस का फ्रैंचाइजी के पर्स पर भी असर नहीं पड़ता है। जैसे कि हार्दिक पांड्या को खरीदने पर मुंबई के पर्स से 15 करोड़ कम हुए। जबकि गुजरात के पर्स में उतनी राशि जोड़ी गई। इसमें ट्रांसफर फीस का कोई लेनादेना नहीं रहता है।

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रोहित शर्मा ले सकते हैं बड़ा फैसला

मुंबई इंडियंस ने आईपीएल नीलामी से ठीक पहले कप्तान रोहित शर्मा को हटाकर हार्दिक पंड्या को मुंबई इंडियंस की कप्तानी सौंप दी है। ऐसे में रोहित शर्मा किसी और टीम का रुख कर सकते हैं और नये कप्तान बन सकते हैं।