भारत टी-ट्वेंटी विश्व कप हार गया है, इस मुश्किल वक्त में पूरा देश खिलाड़ियों के साथ खड़ा है. लेकिन ऐसा भी नही होना चाहिए कि हम हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहे और लगातार हार का सामना करते रहे. टी20 विश्व कप में हार से हमें कुछ सबक सीखना चाहिए और आगे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद करनी चाहिए. आइए इस लेख में समझने की कोशिश करते हैं उन गलतियों के बारे जो हमने इस विश्व कप में किया है.

सलामी बल्लेबाजों की धीमी शुरुआत

टी-ट्वेटी विश्व कप के हर मैच में भारत के सलामी बल्लेबाज कप्तान रोहित शर्मा और उपकप्तान केएल राहुल ने धीमी शुरुआत दी है. तेज शुरुआत की बात तो दूर है इस टूर्नामेंट के हर मैच में पावरप्ले के अंदर ही भारतीय सलामी बल्लेबाज पवेलियन लौट जाते हैं. इससे होता यह है कि बाकि बल्लेबाजों पर प्रेशर आ जाता है और भारत की रन गति धीमी हो जाती है.

युजवेंद्र चहल को मौका नही

टी20 विश्व कप से पहले भारत के प्रमुख स्पिनर युजवेंद्र चहल थे, लेकिन भारतीय टीम मैनेजमेंट और हेड कोच राहुल द्रविड़ ने उन्हें एक भी मैच में मौका नही दिया. भारतीय मैनेजमेंट यह देख रहा था कि हर टीम एक लेग स्पिनर के साथ उतर रहा है, लेकिन भारत ने ऐसा नही किया.

सेमीफाइनल इंग्लैंड के खिलाफ था और चहल का इंग्लैंड के खिलाफ प्रदर्शन भी शानदार था. युजवेंद्र चहल ने 11 मैचों में 16 विकेट चटकाया था. इंग्लैंड के खिलाफ अश्विन को 5 मैचों में सिर्फ 1 मिला था फिर भी उनको खिलाया गया.

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युवा खिलाड़ियों को देना होगा मौका

भारतीय कप्तान रोहित शर्मा की उम्र इस समय 35 साल है अगले टी-ट्वेंटी विश्व कप तक वह 37 साल के हो जाएंगे. ऐसे में भारत को एक युवा कप्तान खोजने की जरूरत है. युवा कप्तान के साथ-साथ युवा खिलाड़ियों को भी मौका देना होगा.

भारत को पृथ्वी शॉ, शुभमन गिल, रजत पाटीदार और राहुल त्रिपाठी जैसे युवाओं को ज्यादा से ज्यादा मौका देना होगा. अगर भारतीय मैंनेजमेंट उन्हें पर्याप्त मौका नही देगा तो वह जल्दी निखर नही पाएंगे.

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