बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती (Mayawati) ने अयोध्या के राम मंदिर (Ram Mandir) के बाद बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों से इस तरह की खबरें सामने आना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
मायावती (Mayawati) ने कहा कि श्रद्धालु अपनी आस्था और विश्वास के साथ मंदिरों में दान करते हैं, इसलिए इन मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
Mayawati ने राजनीतिकरण से बचने की दी सलाह
बसपा प्रमुख मायावती (Mayawati) ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि धार्मिक आस्था से जुड़े विवादों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए न किया जाए।
मायावती (Mayawati) का कहना था कि कानून अपना काम करे और जांच एजेंसियों को बिना किसी दबाव के सच्चाई सामने लाने का अवसर दिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म और राजनीति का अनावश्यक मिश्रण लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।
पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग
मायावती ने सुझाव दिया कि देश के सभी प्रमुख मंदिरों में दान और चढ़ावे के प्रबंधन के लिए एक पारदर्शी और आधुनिक व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिन प्रसिद्ध मंदिरों में लेखा-जोखा और ऑडिट की प्रभावी प्रणाली पहले से लागू है, उसी तरह की व्यवस्था अन्य धार्मिक संस्थानों में भी लागू की जानी चाहिए। इससे भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद और अनियमितता की आशंका कम होगी तथा श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा।
जांच और जवाबदेही पर जोर
मायावती ने कहा कि चाहे मामला राम मंदिर का हो या बद्रीनाथ धाम का, किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरी हो और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जवाबदेही और पारदर्शिता सबसे आवश्यक है।
