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योगी आदित्यनाथ का अखिलेश यादव पर बड़ा हमला, बोले- मुलायम सिंह की विरासत को पहुंचा रहे हैं ठेस

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उत्तर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अपने पिता और पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक विरासत को कमजोर कर रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मुलायम सिंह यादव अपने जीवनकाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में नहीं थे और वे हमेशा इसका विरोध करते थे। उन्होंने दावा किया कि आज की समाजवादी पार्टी उसी विचारधारा से दूर चली गई है।

योगी के आरोप और राजनीतिक संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने की कोशिश की, तब मुलायम सिंह यादव ने इसका विरोध किया था। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वे बार-बार कांग्रेस के साथ गठबंधन कर अपने पिता की राजनीतिक सोच और विरासत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। योगी ने कांग्रेस पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप भी लगाया और कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय था। उनके अनुसार, कांग्रेस के साथ गठबंधन करना उन सिद्धांतों से समझौता है जिनके लिए मुलायम सिंह यादव ने कभी संघर्ष किया था।

समाजवादी पार्टी का पलटवार

योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद समाजवादी पार्टी ने भी कड़ा जवाब दिया। पार्टी नेताओं ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रही है। उनका कहना है कि भाजपा इतिहास और राजनीतिक घटनाओं को अपने हिसाब से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने यह भी कहा कि वर्तमान गठबंधन जनता के हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के उद्देश्य से किया गया है तथा इसे केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए।

2027 चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा और विपक्ष के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। भाजपा जहां विपक्षी गठबंधन पर सवाल उठा रही है, वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस सरकार की नीतियों को मुद्दा बना रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में विरासत, गठबंधन और लोकतंत्र जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रह सकते हैं। फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं और प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने के संकेत दिखाई दे रहे हैं।