मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) को लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस विषय पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य राज्य में सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून लागू करना है, जिससे विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे मामलों में एक समान नियम लागू हो सकें।
राज्य सरकार ने यूसीसी के मसौदे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए गठित समिति विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त कर रही है। सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता से न्याय व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी तथा सभी नागरिकों को समान अधिकार मिल सकेंगे।
5 जुलाई तक आ सकता है ड्राफ्ट
सूत्रों के अनुसार, यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रारंभिक मसौदा 5 जुलाई तक तैयार किया जा सकता है। इसके बाद इसे सार्वजनिक सुझावों और आपत्तियों के लिए जारी किया जाएगा। आम नागरिक, सामाजिक संगठन, धार्मिक प्रतिनिधि और कानूनी विशेषज्ञ अपने सुझाव सरकार को दे सकेंगे।
सरकार चाहती है कि यूसीसी का अंतिम स्वरूप व्यापक चर्चा और सहमति के आधार पर तैयार किया जाए। इसी कारण मसौदे को सीधे लागू करने के बजाय पहले लोगों की राय ली जाएगी। इससे कानून को लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी या विवाद की संभावना भी कम होगी।
विधानसभा में पेश हो सकता है विधेयक
यदि मसौदे पर प्राप्त सुझावों के बाद सरकार संतुष्ट होती है, तो आगामी विधानसभा सत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड से संबंधित विधेयक पेश किया जा सकता है। विधानसभा से मंजूरी मिलने के बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा।
मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल हो सकता है जो उत्तराखंड की तरह यूसीसी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। भाजपा लंबे समय से समान नागरिक संहिता को अपने प्रमुख एजेंडों में शामिल करती रही है। ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूसीसी पर व्यापक संवाद और सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। इससे कानून को लेकर समाज में विश्वास बढ़ेगा और इसके सफल क्रियान्वयन का मार्ग भी प्रशस्त होगा। आने वाले दिनों में सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले मसौदे और उस पर होने वाली चर्चा पर पूरे देश की नजर रहेगी।
