उत्तर प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी Harshita Mathur को बाल विकास एवं पोषण विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। यह विभाग सीधे तौर पर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और आंगनबाड़ी सेवाओं से जुड़ा हुआ है। ऐसे में इस पद को सरकार के सबसे संवेदनशील विभागों में गिना जाता है।
लगातार दो जिलों की कमान संभाल चुकी हैं हर्षिता माथुर
आईएएस हर्षिता माथुर 2013 बैच की अधिकारी हैं और अपने सख्त प्रशासनिक फैसलों तथा तेज कार्यशैली के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने कई जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं और कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें पहली बार साल 2021 में किसी जिले की कमान सौंपी गई थी। इससे पहले वह प्रशासनिक वेटिंग में भी रह चुकी थीं, लेकिन बाद में उनकी कार्यक्षमता को देखते हुए लगातार अहम जिम्मेदारियां मिलती चली गईं।
रायबरेली और कासगंज में दिखाया प्रशासनिक दम
हर्षिता माथुर इससे पहले रायबरेली और कासगंज जैसे अहम जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। रायबरेली जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले में उनकी कार्यशैली की काफी चर्चा हुई थी। प्रशासनिक स्तर पर तेजी से फैसले लेने और योजनाओं की मॉनिटरिंग को लेकर उनकी पहचान बनी। साल 2023 में उन्हें कासगंज से रायबरेली का डीएम बनाया गया था, जिसे बड़ा प्रशासनिक फैसला माना गया था।
बाल विकास एवं पोषण विभाग क्यों है अहम?
बाल विकास एवं पोषण विभाग उत्तर प्रदेश में कुपोषण कम करने, बच्चों के स्वास्थ्य सुधारने और महिलाओं को पोषण सेवाएं देने का काम करता है। आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों तक सरकारी योजनाएं पहुंचाने की जिम्मेदारी इसी विभाग पर होती है। ऐसे में सरकार ने इस विभाग की कमान एक अनुभवी और फील्ड प्रशासन में मजबूत पकड़ रखने वाली अधिकारी को सौंपी है।
योगी सरकार का भरोसा बनीं हर्षिता माथुर
सरकारी हलकों में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उन अधिकारियों पर ज्यादा भरोसा दिखाते हैं जो फील्ड में बेहतर प्रदर्शन करते हैं। हर्षिता माथुर का नाम भी ऐसे अधिकारियों में शामिल माना जा रहा है। लगातार अहम पदों पर उनकी तैनाती इसी बात का संकेत देती है कि सरकार उन्हें एक प्रभावशाली और परिणाम देने वाली अधिकारी के रूप में देख रही है।
