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अपने गांव पहुंचे योगी का दिखा पहाड़ी अंदाज, गढ़वाली भाषा में ग्रामीणों को दिया खास निमंत्रण

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath एक बार फिर अपने पैतृक गांव पंचूर पहुंचकर चर्चा में आ गए। इस दौरान उनका एक बेहद आत्मीय और भावुक अंदाज देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद ग्रामीणों का दिल जीत लिया। धार्मिक कार्यक्रम के बाद जब उन्होंने गढ़वाली भाषा में ग्रामीणों को भोजन के लिए आमंत्रित किया, तो पूरा माहौल अपनत्व से भर उठा।

गांव में दिखी सादगी और अपनापन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड के यमकेश्वर क्षेत्र स्थित अपने पैतृक गांव पंचूर पहुंचे थे। यहां मंदिर परिसर में यज्ञ और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, बुजुर्ग, महिलाएं और स्थानीय लोग मौजूद रहे। धार्मिक अनुष्ठान पूरा होने के बाद सामूहिक भोज का आयोजन किया गया, जहां योगी आदित्यनाथ का अलग ही रूप देखने को मिला।

गढ़वाली भाषा में बोले योगी

भोज के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से गढ़वाली बोली में कहा — “सब भात खैकन जरूर जाईं”, यानी “सब लोग भोजन करके जरूर जाना।” योगी आदित्यनाथ के मुंह से अपनी मातृभाषा सुनते ही ग्रामीण भावुक हो उठे। लोगों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया और कई बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद भी दिया।

स्थानीय लोगों का कहना था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद भी योगी आदित्यनाथ अपने गांव और संस्कृति से पूरी तरह जुड़े हुए हैं। उनका यह व्यवहार दिखाता है कि उन्होंने अपनी जड़ों को कभी नहीं भुलाया।

ग्रामीणों से की आत्मीय मुलाकात

कार्यक्रम के दौरान योगी आदित्यनाथ ने गांव के लोगों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। उन्होंने बुजुर्गों का हालचाल पूछा, महिलाओं से बातचीत की और पुराने परिचितों के साथ समय बिताया। गांव के कई लोग उन्हें बचपन से जानते हैं, इसलिए मुख्यमंत्री का यह दौरा उनके लिए भावुक क्षण बन गया।

ग्रामीणों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ जब भी गांव आते हैं, तो बिल्कुल सामान्य व्यक्ति की तरह सबसे मिलते हैं। यही वजह है कि गांव के लोगों में उनके प्रति विशेष लगाव दिखाई देता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

योगी आदित्यनाथ का गढ़वाली भाषा में ग्रामीणों को निमंत्रण देने वाला वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग उनके इस पहाड़ी अंदाज की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा कि इतने बड़े पद पर होने के बावजूद अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखना बड़ी बात है।