रांची के बरियातू स्थित बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन पर कथित अवैध कब्जे और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर झारखंड हाई कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस एम. एस. सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई। अदालत ने केंद्र के आग्रह को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तिथि निर्धारित की है।
हेमंत सोरेन ने याचिका दायर कर विशेष पीएमएलए (ईडी) अदालत में चल रहे ट्रायल की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने की गुहार लगाई है।
हेमंत सोरेन की ओर से दी गई प्रमुख दलीलें
चार्जशीट के बाद भी जांच जारी रखने पर आपत्ति:
हेमंत सोरेन के अधिवक्ता ने कोर्ट के समक्ष दलील दी कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मामले की विस्तृत जांच पूरी करने के बाद विशेष अदालत में औपचारिक आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया है। इसके बावजूद जांच एजेंसी द्वारा लगातार यह कहा जा रहा है कि मामले में अनुसंधान अभी जारी है।
ट्रायल रोकने की मांग:
दलील दी गई कि जब जांच एजेंसी का अनुसंधान पूर्ण ही नहीं हुआ है और लगातार जांच की बात कही जा रही है, तो ऐसी असमंजस की स्थिति में निचली अदालत में ट्रायल (मुकदमे की कार्यवाही) को आगे बढ़ाने पर रोक लगाई जानी चाहिए।
केंद्र को बनाया गया था प्रतिवादी:
हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में इस मामले में केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाते हुए अपना पक्ष रखने और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
30 नवंबर से शुरू होनी है गवाहियों की प्रक्रिया
यह पूरा मामला बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ विवादित जमीन के फर्जीवाड़े और उससे जुड़े धनशोधन से संबंधित है, जिसमें ईडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मुख्य अभियुक्तों में शामिल किया है:
आरोप तय करने का आदेश:
विशेष ईडी अदालत ने 30 सितंबर को हेमंत सोरेन के खिलाफ औपचारिक आरोप (Charges) तय कर दिए थे।
गवाही दर्ज करने का निर्देश:
निचली अदालत ने ईडी को आगामी 30 नवंबर से गवाहों के बयान और गवाही दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था।
हेमंत सोरेन ने निचली अदालत के आरोप तय करने और गवाही शुरू कराने के इसी आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी है। मामले में अब 19 नवंबर को होने वाली सुनवाई काफी निर्णायक होगी।
