बिहार विधानमंडल के आगामी शीतकालीन सत्र की तिथियां औपचारिक रूप से तय कर दी गई हैं। यह सत्र 30 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर तक चलेगा। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में शीतकालीन सत्र आहूत करने के प्रस्ताव पर कैबिनेट ने अपनी सहमति दे दी।
पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र के दौरान विधानसभा और विधान परिषद की कुल 5 बैठकें (सोमवार से शुक्रवार) आयोजित की जाएंगी, जिसमें सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और वित्तीय अनुपूरक बजट को पटल पर रखेगी।
सरकार और विपक्ष दोनों के लिए बेहद अहम सत्र
विधानमंडल का यह शीतकालीन सत्र सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है:
सरकारी एजेंडा: सरकार अपनी विकास प्राथमिकताओं, नवस्वीकृत नीतियों (जैसे बिहार MSME नीति 2026, AI पॉलिसी) और जनहित से जुड़े प्रमुख विधेयकों को सदन के समक्ष पारित कराने के लिए प्रस्तुत करेगी।
विपक्ष की तैयारी: विपक्ष को कानून-व्यवस्था, सूखा नशा, हालिया प्रशासनिक विवादों और जनसरोकार के ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को घेरने का मौका मिलेगा।
सदन में दिखेंगे नए चेहरे: हाल ही में संपन्न हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के बाद सदन में कई नवनिर्वाचित चेहरे भी इस सत्र के दौरान शपथ लेते और विधायी प्रक्रिया में भाग लेते नजर आएंगे।
सम्राट सरकार का दूसरा विधानसभा सत्र
सम्राट चौधरी सरकार के कार्यकाल का यह दूसरा पूर्ण सत्र होगा:
इससे पहले जुलाई माह में 5 दिवसीय मानसून सत्र (20 से 24 जुलाई) आयोजित किया गया था, जो सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के 100 दिन पूरे होने के तुरंत बाद हुआ था।
मानसून सत्र के दौरान विभिन्न नीतिगत मुद्दों और जनहित के सवालों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली थी। आगामी शीतकालीन सत्र में भी सियासी पारा गरम रहने के पूरे आसार हैं।
