बिहार के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी व डीजी (ऑपरेशंस/एसटीएफ) कुंदन कृष्णन और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बक्सर सांसद सुधाकर सिंह के बीच शुरू हुआ विवाद अब आधिकारिक जांच के दायरे में आ गया है। सांसद सुधाकर सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए शिकायती पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गृह विभाग के प्रधान सचिव को पूरे मामले की विस्तृत जांच करने और समुचित निर्णय लेने का आदेश दिया है।
मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से उप सचिव मो. इमरान के हस्ताक्षर से गृह विभाग को निर्देश भेजा गया है कि जांच के बाद लिए गए निर्णय और की गई कार्रवाई की आधिकारिक सूचना सांसद सुधाकर सिंह और मुख्यमंत्री सचिवालय दोनों को उपलब्ध कराई जाए।
सुधाकर सिंह ने उठाए सेवा नियमों और अधिकारों पर सवाल
राजद के वरिष्ठ नेता जगदानंद सिंह के पुत्र और सांसद सुधाकर सिंह को डीजी कुंदन कृष्णन द्वारा ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजे जाने के बाद उन्होंने इसे लेकर प्रशासनिक व कानूनी सवाल खड़े किए हैं:
सरकारी इजाजत का सवाल: सांसद ने सवाल उठाया है कि क्या एक सेवारत सरकारी पदाधिकारी (आईपीएस) ने सरकार की विधिवत अनुमति लेकर एक जनप्रतिनिधि को मानहानि का नोटिस भेजा है या अपनी निजी हैसियत से?
अखिल भारतीय सेवा नियमावली: यदि नोटिस निजी हैसियत से भेजा गया है, तो सरकारी सेवा नियमावली (All India Services Rules) के तहत अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई बनती है।
एनकाउंटर में सीनियर कमान की जवाबदेही: सुधाकर सिंह ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि निचले स्तर के पुलिसकर्मियों पर तो कार्रवाई हुई, लेकिन एसटीएफ का नेतृत्व कर रहे उच्चाधिकारियों को बख्श दिया गया, जबकि ऑपरेशनल स्तर पर शीर्ष कमान की सहमति अनिवार्य होती है।
डीजी कुंदन कृष्णन का पक्ष
डीजी कुंदन कृष्णन ने अपने कानूनी नोटिस में कहा है कि सांसद सुधाकर सिंह द्वारा लगातार मीडिया और जनसभाओं में उनके खिलाफ अनर्गल, मनगढ़ंत और बेबुनियाद आरोप लगाकर उनकी पेशेवर छवि व प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी के खिलाफ उन्होंने ₹5 करोड़ के हर्जाने का लीगल नोटिस भेजा है।
नवादा डीएम और एसपी के खिलाफ लोकसभा में विशेषाधिकार हनन नोटिस
इस मामले के साथ ही सांसद सुधाकर सिंह ने एक और मोर्चा खोल दिया है:
26 अक्टूबर को नवादा में किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले पर सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को नवादा के डीएम और एसपी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) का नोटिस भेजा है।
सांसद का कहना है कि उसी शाम दिल्ली के लिए उनकी ट्रेन निर्धारित थी, लेकिन पुलिस द्वारा जबरन हिरासत में रखे जाने के कारण उनकी ट्रेन छूट गई। उन्होंने इसे संसदीय दायित्वों के निर्वहन में जानबूझकर डाला गया व्यवधान बताते हुए अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।
