उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंचों के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर गंभीर चिंता जताई है। काकोरी ट्रेन एक्शन के 101वें वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया अब षड्यंत्र फैलाने का माध्यम भी बनता जा रहा है। उनके अनुसार, कुछ देशविरोधी ताकतें डिजिटल मंचों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ अफवाह फैलाने और समाज को गुमराह करने के लिए कर रही हैं। उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर मिलने वाली सूचनाओं को लेकर सतर्क रहने और बिना जांचे किसी भी खबर को आगे साझा नहीं करने की अपील की।
आपसी फूट से देश को कमजोर करने की कोशिश
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अतीत में आपसी फूट और षड्यंत्रों के कारण गुलामी का शिकार हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी कुछ ताकतें क्षेत्र, जाति और भाषा के नाम पर समाज को बांटने का प्रयास कर रही हैं। योगी ने कहा कि सोशल मीडिया की पहुंच बहुत व्यापक है, इसलिए अफवाह या भ्रामक जानकारी तेजी से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच सकती है। ऐसे में समाज को जागरूक रहना जरूरी है।
काकोरी के क्रांतिकारियों के बलिदान को किया याद
योगी आदित्यनाथ ने काकोरी ट्रेन एक्शन के क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि 9 अगस्त 1925 को राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खां, राजेंद्र नाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशन सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने ब्रिटिश शासन को चुनौती दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन वीरों का उद्देश्य देश को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराना था। उन्होंने लोगों से स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों की जानकारी जुटाने और उनकी स्मृतियों को सुरक्षित रखने का भी आह्वान किया।
युवाओं को इतिहास से जोड़ने की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी बिखरी सामग्री, दस्तावेज और स्मृतियों को एकत्र किया जाना चाहिए। उन्होंने क्रांतिकारियों से जुड़े स्मारकों के संरक्षण और उनके सौंदर्यीकरण में समाज की भागीदारी पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि नई पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि उनमें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और गौरव की भावना मजबूत हो।
सोशल मीडिया के इस्तेमाल में जिम्मेदारी जरूरी
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में राष्ट्र को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विकसित और आत्मनिर्भर भारत की कल्पना तभी साकार हो सकती है, जब समाज में एकता और राष्ट्रहित की भावना मजबूत हो। इसी संदर्भ में सोशल मीडिया के जिम्मेदार इस्तेमाल की जरूरत भी सामने आती है। डिजिटल मंचों पर किसी भी दावे को साझा करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है, क्योंकि गलत सूचना सामाजिक तनाव बढ़ा सकती है। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सोशल मीडिया सार्वजनिक चर्चा और जनमत को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।
