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‘जो कुर्सी कल जानी है, वह आज चली जाए’, सीएम योगी ने क्यों कही ये बात? नोएडा से जुड़ा है पूरा मामला

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक बयान इन दिनों राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि “जो कुर्सी कल जानी है, वह आज चली जाए, मुझे इसकी चिंता नहीं है।” मुख्यमंत्री ने यह बात अपने उस अनुभव का जिक्र करते हुए कही, जब उन्हें भी नोएडा जाने से जुड़ी एक पुरानी राजनीतिक धारणा के बारे में बताया गया था। योगी ने कहा कि उनके लिए कुर्सी से ज्यादा महत्वपूर्ण जनता की सेवा और उसकी समस्याओं का समाधान करना है।

नोएडा जाने से जुड़ी थी पुरानी धारणा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्होंने नोएडा जाने का कार्यक्रम बनाया, तब उन्हें बताया गया कि वहां जाने से मुख्यमंत्री की कुर्सी चली जाती है। यह एक पुरानी राजनीतिक धारणा थी, जिसके कारण कई मुख्यमंत्री नोएडा जाने से बचते रहे थे। योगी ने कहा कि उन्होंने ऐसी मान्यताओं को महत्व नहीं दिया और जनता के बीच जाने को प्राथमिकता दी। उनके अनुसार, अगर कोई कुर्सी केवल किसी स्थान पर जाने से चली जाती है तो ऐसी कुर्सी की चिंता करने का कोई अर्थ नहीं है।

‘जनता के लिए आए हैं, जनता की सुनवाई करेंगे’

योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री का पद जनता की सेवा के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी अंधविश्वास या राजनीतिक धारणा के कारण जनता से दूरी नहीं बनाएंगे। उनका कहना था कि जनता के लिए काम करना और उसकी समस्याएं सुनना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जो कुर्सी कल जानी है, वह आज चली जाए, लेकिन जनता की सुनवाई और विकास कार्य नहीं रुकने चाहिए।

पिछली सरकारों पर भी साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने इसी दौरान समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि 2017 से पहले प्रदेश के मुख्यमंत्रियों में नोएडा जाने को लेकर डर था और इसी वजह से कई लोग वहां जाने से बचते थे। योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने ऐसी धारणाओं को पीछे छोड़ते हुए विकास और जनसुनवाई को प्राथमिकता दी। उन्होंने यह भी दावा किया कि जनता ने पिछली सरकारों को उनके कामकाज के आधार पर सत्ता से बाहर किया।

2027 चुनाव से पहले बयान के सियासी मायने

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। ऐसे में योगी का यह बयान केवल नोएडा से जुड़ी पुरानी धारणा पर टिप्पणी नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक दृष्टिकोण का संदेश भी माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने बयान के जरिए यह बताने की कोशिश की कि सत्ता और पद से ज्यादा उनके लिए जनता और विकास महत्वपूर्ण हैं। अब यह बयान चुनावी राजनीति में किस तरह इस्तेमाल होता है, इस पर भी सभी की नजर रहेगी।