दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) को बधाई दी है। ABVP ने चार केंद्रीय पदों में से तीन पर जीत दर्ज की है।
अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की।
‘राष्ट्रवाद के प्रति युवाओं की आस्था’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ABVP की जीत पर बधाई देते हुए इसे राष्ट्रवाद के प्रति युवाओं की आस्था और प्रतिबद्धता से जोड़ा।
उन्होंने विजयी प्रत्याशियों, कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। योगी की प्रतिक्रिया में छात्र राजनीति के इस परिणाम को युवाओं के रुख से जोड़कर देखा गया है।
चार में से तीन पद ABVP के खाते में
DUSU चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद अपने नाम किए। अध्यक्ष पद पर यश डबास ने जीत दर्ज की, जबकि रिया छाबड़ी सचिव और लक्ष्य राज सिंह संयुक्त सचिव चुने गए। दूसरी ओर, उपाध्यक्ष पद पर पूर्व NSUI सदस्य और निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीत हासिल की। उन्होंने ABVP और NSUI दोनों के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ा।
NSUI को केंद्रीय पैनल में नहीं मिली सीट
इस चुनाव का एक प्रमुख पहलू यह रहा कि कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI केंद्रीय पैनल की किसी भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 2015 के बाद यह पहली बार है, जब NSUI DUSU के केंद्रीय पैनल में कोई सीट नहीं जीत पाई। हालांकि, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत ने चुनाव परिणाम को चारों पदों पर ABVP के एकतरफा प्रदर्शन से अलग रखा।
चुनाव में करीब 40 प्रतिशत मतदान
DUSU चुनाव में मतदान प्रतिशत 40.46 प्रतिशत रहा। चुनाव के दौरान छात्र सुरक्षा और छात्रावास जैसी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहे। हालिया छात्रावास भवन हादसे की पृष्ठभूमि में सुरक्षा और आवास से जुड़े सवालों को उम्मीदवारों ने उठाया था। चुनाव परिणाम के बाद ABVP के विजयी प्रतिनिधियों ने भी छात्रों से जुड़े मुद्दों पर काम करने की बात कही।
युवाओं और छात्र राजनीति पर चर्चा तेज
DUSU परिणाम सामने आने के बाद छात्र राजनीति में युवाओं की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ABVP की तीन पदों पर जीत को उसके समर्थक राष्ट्रवाद और ‘नेशन फर्स्ट’ विचार से जोड़ रहे हैं। वहीं, स्वतंत्र उम्मीदवार की उपाध्यक्ष पद पर जीत यह भी दिखाती है कि चुनाव में संगठन आधारित मुकाबले के साथ व्यक्तिगत उम्मीदवारों की भूमिका भी बनी हुई है।
योगी के बयान के राजनीतिक मायने
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब देशभर में युवाओं और छात्रों को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। हालांकि DUSU चुनाव का परिणाम दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों का चुनावी जनादेश है और इसे पूरे देश के युवाओं की राजनीतिक पसंद का प्रत्यक्ष प्रतिनिधि मानना उचित नहीं होगा।
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