मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों से बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों का स्थान स्कूल और खेल के मैदान में होना चाहिए, न कि कारखानों, दुकानों या अन्य कार्यस्थलों पर। बाल श्रम न केवल बच्चों के अधिकारों का हनन करता है, बल्कि उनके उज्ज्वल भविष्य को भी प्रभावित करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है। यदि बच्चों को उचित अवसर मिलेंगे तो वे देश और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।
शिक्षा ही है विकास का आधार
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव होती है। बाल श्रम बच्चों को शिक्षा से दूर कर देता है, जिससे उनका मानसिक और सामाजिक विकास बाधित होता है। इसलिए जरूरी है कि हर बच्चा विद्यालय जाए और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करे।
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास बाल श्रम की घटनाओं पर नजर रखें और ऐसी जानकारी संबंधित विभागों को दें। इससे बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
जनभागीदारी से मिलेगी सफलता
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से बाल श्रम को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज, अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना होगा। जनभागीदारी के माध्यम से ही बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बच्चों के कल्याण और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार विभिन्न योजनाएं चला रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य हर बच्चे को बेहतर भविष्य प्रदान करना है।
जागरूक समाज से बनेगा बेहतर भविष्य
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि एक जागरूक और संवेदनशील समाज ही बाल श्रम जैसी कुप्रथा को समाप्त कर सकता है। यदि हम सभी मिलकर प्रयास करें तो बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनाया जा सकता है। बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण न केवल बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल करेगा, बल्कि राज्य और देश के समग्र विकास को भी नई दिशा देगा।
