कर्नाटक की सहकारी संस्था कैंपको (CAMPCO) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सुपारी (अरेका नट) व्यापार पर लगाए जाने वाले मंडी टैक्स को हटाने की मांग की है। संस्था का कहना है कि यह टैक्स व्यापारियों और किसानों दोनों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रहा है, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।
कैंपको देश की प्रमुख सहकारी संस्थाओं में शामिल है, जो सुपारी और कोको उत्पादकों के हितों के लिए काम करती है। संस्था का मानना है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े बाजार में कर संबंधी बाधाएं व्यापार को सीमित करती हैं और किसानों को उचित लाभ मिलने में परेशानी होती है।
व्यापार पर पड़ रहा असर
संस्था के प्रतिनिधियों के अनुसार, मंडी टैक्स लागू होने से व्यापारिक लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं और किसानों दोनों पर पड़ता है। व्यापारियों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है, जिससे सुपारी की कीमतें बढ़ने की आशंका रहती है।
कैंपको का कहना है कि देश के कई राज्यों में कृषि उत्पादों पर कर ढांचे को सरल बनाया जा रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में मंडी टैक्स जारी रहने से प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। संस्था का तर्क है कि करों में कमी से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और बाजार अधिक सक्रिय होगा।
किसानों को हो सकता है लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मंडी टैक्स हटाया जाता है, तो किसानों को अपनी उपज के बेहतर दाम मिल सकते हैं। साथ ही राज्यों के बीच कृषि व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और उपभोक्ताओं को भी उचित कीमत पर उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मंडी शुल्क राज्य सरकारों के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में किसी भी बदलाव से पहले सरकार को किसानों, व्यापारियों और राजस्व हितों के बीच संतुलन बनाना होगा।
सरकार के फैसले पर नजर
अब सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। यदि सरकार इस मांग पर सकारात्मक विचार करती है, तो इससे सुपारी व्यापार को नई गति मिल सकती है। वहीं, यह फैसला कृषि बाजार सुधारों की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। आने वाले समय में सरकार की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि किसानों और व्यापारियों को कितनी राहत मिलती है तथा राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
