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करोड़ों की सड़कों को नुकसान पहुंचाने वाली एजेंसियों से वसूला जाए जुर्माना: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

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उत्तर प्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर बार-बार सड़कों की खुदाई और उससे होने वाले नुकसान को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन एजेंसियों की लापरवाही से करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कों को नुकसान पहुंचता है, उनसे जुर्माना वसूला जाए। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से तैयार की गई सड़कों को बार-बार तोड़ना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि विभिन्न विभागों और एजेंसियों को विकास कार्यों के लिए बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा। अक्सर देखा जाता है कि सड़क निर्माण के कुछ समय बाद ही जलापूर्ति, सीवर लाइन, गैस पाइपलाइन या अन्य परियोजनाओं के लिए सड़कें खोद दी जाती हैं। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी होती है, बल्कि आम लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि सड़क निर्माण से पहले सभी संबंधित विभाग आपस में समन्वय बनाकर कार्ययोजना तैयार करें। यदि किसी एजेंसी को सड़क के नीचे कोई कार्य करना है तो उसे पहले ही पूरा कर लिया जाए, ताकि बाद में नई सड़क को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिन एजेंसियों द्वारा नियमों का पालन नहीं किया जाएगा और जिनकी वजह से सड़कें क्षतिग्रस्त होंगी, उनसे नुकसान की भरपाई कराई जाएगी। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सड़क खोदने की अनुमति देने से पहले सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह निर्णय सरकारी संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा और सार्वजनिक संपत्तियों को अनावश्यक नुकसान से बचाया जा सकेगा। साथ ही सड़कों की गुणवत्ता और उनकी आयु भी बढ़ेगी।

प्रदेश सरकार लगातार बेहतर सड़क नेटवर्क तैयार करने पर काम कर रही है। ऐसे में नई बनी सड़कों को बार-बार नुकसान पहुंचने से रोकना आवश्यक है। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद उम्मीद की जा रही है कि विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता देखने को मिलेगी। इससे जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और सरकारी धन का भी प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।