उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर में दान चोरी के कथित मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कुछ लोगों की गलत हरकतों के कारण पूरे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बदनाम करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने साक्ष्यों के आधार पर कुछ आरोपियों की पहचान की है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
एसआईटी जांच और कार्रवाई पर सरकार का भरोसा
मुख्यमंत्री ने बताया कि ट्रस्ट की अनुशंसा पर ही राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय एसआईटी का गठन किया था। प्रारंभिक जांच में दान गिनने की प्रक्रिया से जुड़े लगभग 150 लोगों में से केवल आठ लोगों के खिलाफ साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि एसआईटी की सिफारिश के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और आरोपियों की गिरफ्तारी सहित आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई। सरकार का उद्देश्य पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच सामने लाना और दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना है।
विपक्ष के आरोपों पर किया पलटवार
योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे इस मामले का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्तियों की कथित संलिप्तता के आधार पर पूरे ट्रस्ट, अयोध्या और भगवान श्रीराम की विरासत पर सवाल उठाना उचित नहीं है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अफवाहों से बचने और जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पारदर्शिता और आस्था दोनों की रक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा करने के साथ-साथ संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखना है। उन्होंने विश्वास जताया कि जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने दोहराया कि यदि किसी ने दान राशि में अनियमितता की है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी, लेकिन कुछ लोगों की कथित गलती के आधार पर पूरे ट्रस्ट को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
