Posted inन्यूज, उत्तर प्रदेश, राजनीति

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, PWD के सिविल इंजीनियरों के वित्तीय अधिकार पांच गुना बढ़े

योगी सरकार सख्त SDM
जमीन से जुड़े मामलों में लापरवाही पर योगी सरकार सख्त, 7 SDM रडार पर, मांगा गया स्पष्टीकरण
News on WhatsAppJoin Now

उत्तर प्रदेश में निर्माण और विकास परियोजनाओं को तेजी देने के लिए योगी सरकार ने अभियंत्रण विभागों के वित्तीय अधिकारों में बड़ा बदलाव किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में विभिन्न अभियंत्रण विभागों के अधिकारियों की वित्तीय सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सबसे बड़ा बदलाव लोक निर्माण विभाग यानी PWD के सिविल अभियंताओं के अधिकारों में किया गया है, जिन्हें पांच गुना तक बढ़ाया गया है।

PWD सिविल अभियंताओं की सीमा पांच गुना

कैबिनेट के फैसले के अनुसार लोक निर्माण विभाग के सिविल अभियंताओं के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना वृद्धि होगी। वहीं विद्युत और यांत्रिक कार्यों से जुड़े अभियंताओं के वित्तीय अधिकार दो गुना किए गए हैं। इसी तरह सिंचाई, लघु सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण और भूगर्भ जल जैसे विभागों में भी वित्तीय अधिकारों की सीमा दो गुना तक बढ़ाई गई है। ये बदलाव 1995 में निर्धारित वित्तीय सीमाओं को आधार बनाकर किए गए हैं।

मुख्य अभियंता अब 10 करोड़ तक कर सकेंगे मंजूरी

नई व्यवस्था में PWD के मुख्य अभियंता को अब 10 करोड़ रुपये तक के कार्यों की स्वीकृति देने का अधिकार होगा। पहले यह सीमा दो करोड़ रुपये थी। इसी तरह अधीक्षण अभियंता की वित्तीय सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये और अधिशासी अभियंता की सीमा 40 लाख रुपये से बढ़ाकर दो करोड़ रुपये की गई है। सहायक अभियंताओं को भी सीमित दायरे में टेंडर और छोटे कार्यों को मंजूरी देने का अधिकार मिलेगा।

छोटे कार्यों के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार

सरकार के इस फैसले का प्रमुख उद्देश्य छोटे और मध्यम स्तर के निर्माण कार्यों के लिए बार-बार उच्च स्तर से मंजूरी लेने की जरूरत कम करना है। सीमित वित्तीय अधिकारों के कारण कई बार छोटी परियोजनाओं की फाइलें भी उच्च स्तर तक भेजनी पड़ती थीं। नई व्यवस्था से विभागीय स्तर पर निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में देरी कम होने की उम्मीद है।

बढ़ती लागत को देखते हुए लिया गया फैसला

वित्त विभाग के अनुसार अभियंताओं के वित्तीय अधिकार आखिरी बार 1995 में निर्धारित किए गए थे। तब से निर्माण सामग्री, श्रम और सेवाओं की लागत में काफी वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक 1995 से अब तक कीमतों में लगभग 5.52 गुना वृद्धि हुई है। ऐसे में पुरानी वित्तीय सीमाएं मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप नहीं रह गई थीं। कैबिनेट ने इसी आवश्यकता को देखते हुए सीमा संशोधित करने का फैसला किया है।

कई विभागों की परियोजनाओं को मिलेगा लाभ

इस निर्णय का असर PWD के अलावा सिंचाई, लघु सिंचाई, ग्रामीण अभियंत्रण और भूगर्भ जल विभागों के निर्माण कार्यों पर भी पड़ेगा। सरकार का उद्देश्य वित्तीय अधिकारों के विकेंद्रीकरण के जरिए कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना और परियोजनाओं को समय पर आगे बढ़ाना है। अधिकारियों को अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र में निर्णय लेने की अधिक सुविधा मिलने से निर्माण कार्यों की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।