अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण की साक्षी बनी, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने राम मंदिर परिसर स्थित नव-निर्मित शिव मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज का भव्य आरोहण किया। 29 अप्रैल 2026 को आयोजित यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और प्रशासनिक व्यवस्था का अनूठा संगम लेकर आया।
इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने पहले रामलला के दर्शन किए और फिर हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इसके बाद निर्धारित समय पर शिव मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि राम मंदिर परिसर के विकास के एक नए चरण का भी प्रतीक माना जा रहा है।
राम मंदिर के परकोटे में बने इस शिव मंदिर का विशेष महत्व है। यह ‘हरि-हर’ यानी भगवान विष्णु और भगवान शिव की एकता का प्रतीक माना जाता है। अयोध्या की परंपरा में भगवान राम के किसी भी शुभ कार्य से पहले या साथ में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व रहा है। ऐसे में शिव मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण पूरे मंदिर परिसर की पूर्णता और सांस्कृतिक समन्वय का संदेश देता है।
कार्यक्रम को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन कैमरे और विशेष सुरक्षा बल तैनात किए गए। वीवीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए रूट डायवर्जन भी लागू किया गया, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को किसी तरह की असुविधा न हो।
इस आयोजन में बड़ी संख्या में साधु-संत, भाजपा और आरएसएस के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग शामिल हुए। करीब हजार से अधिक विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी ने इस समारोह को और भव्य बना दिया। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण भी किया गया और मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए अयोध्या के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया।
अयोध्या का यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा के जीवंत स्वरूप का प्रतीक बनकर उभरा। राम मंदिर के साथ शिव मंदिर का यह समावेश देश को एकता, श्रद्धा और सांस्कृतिक समरसता का संदेश देता है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन अयोध्या को वैश्विक धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में और मजबूत बनाएंगे।
