अंबेडकर जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई, जब Yogi Adityanath ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के नाम का इस्तेमाल केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये दल “घड़ियाली आंसू” बहाते हैं, जबकि वास्तविकता में उन्होंने कभी दलितों और वंचितों के हितों के लिए काम नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जिन लोगों ने पहले दलितों और गरीबों के अधिकारों को दबाया, वही आज सामाजिक न्याय के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने ऐतिहासिक रूप से उन वर्गों को उनका हक देने के बजाय उन्हें गुमराह करने का काम किया। योगी आदित्यनाथ ने यह भी सवाल उठाया कि अंबेडकर और संत रविदास जैसे महान व्यक्तित्वों के नाम पर बने संस्थानों और जिलों के नाम बदलने के पीछे किन ताकतों की भूमिका रही।
सामाजिक न्याय बनाम सियासत
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने सामाजिक न्याय को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बिना भेदभाव के सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रही है। “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत को दोहराते हुए उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने दलितों, गरीबों और महिलाओं के उत्थान के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय केवल नारों से नहीं, बल्कि नीतियों और कार्यों से स्थापित होता है। उन्होंने शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को सामाजिक समानता का आधार बताया। इस दौरान उन्होंने बाबा साहेब के विचारों को देश के लिए प्रेरणादायक बताते हुए लोगों से उन्हें अपनाने की अपील की।
विपक्ष का पलटवार और राजनीतिक माहौल
दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार अंबेडकर की विचारधारा और संविधान के मूल्यों को कमजोर कर रही है। साथ ही, दलितों के अधिकारों और सामाजिक न्याय को लेकर सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंबेडकर जयंती जैसे अवसर अब केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह दलित वोट बैंक और सामाजिक न्याय की राजनीति का अहम मंच बन चुके हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने तरीके से जनता को संदेश देने की कोशिश करते हैं।
