लखनऊ में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आयोजित ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के कामगारों और पारंपरिक शिल्पकारों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए विभिन्न सहायता प्रदान की। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को स्वरोजगार के लिए चेक और अलग-अलग जिलों से आए कामगारों को उन्नत टूलकिट वितरित किए।
कार्यक्रम में आर्थिक सहायता और आधुनिक उपकरण मिलने के बाद लाभार्थियों ने अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई। सरकार की ओर से दी जा रही मदद का उद्देश्य कारीगरों को उनके हुनर के आधार पर स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और उनके काम को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।
25 साल से सैलून चला रहे मुश्ताक को मिला चेक
लखनऊ के आलमबाग निवासी मोहम्मद मुश्ताक करीब 25 वर्षों से सैलून का काम कर रहे हैं। उन्हें स्वरोजगार के लिए दो लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया। वहीं, कानपुर के आभूषण कारीगर अवधेश को सुनार के काम से संबंधित टूलकिट दी गई। लाभार्थियों ने कहा कि आधुनिक उपकरण मिलने से काम को विस्तार देने में मदद मिलेगी।
महिलाओं को सिलाई मशीन, बढ़ेगा स्वरोजगार
कार्यक्रम में बाराबंकी की वंदना और रमा जायसवाल को सिलाई मशीन भी प्रदान की गई। दोनों महिलाएं सिलाई के प्रशिक्षण के बाद इस काम को आय के साधन के रूप में आगे बढ़ा रही हैं। इसी तरह बढ़ई का काम करने वाले युवाओं को भी आर्थिक सहायता और उपकरण उपलब्ध कराए गए।
कई पारंपरिक व्यवसायों को योजना से जोड़ने पर जोर
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पारंपरिक कामगारों को प्रशिक्षण, टूलकिट और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाता है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार योजना के तहत प्रशिक्षण और टूलकिट के साथ विभिन्न पारंपरिक एवं आधुनिक ट्रेड को भी शामिल किया गया है। अब योजना का दायरा 25 ट्रेड तक विस्तारित किया गया है, जिसमें मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन और डिजिटल फोटोग्राफी जैसे काम भी शामिल हैं।
कार्यक्रम में माटी कला से जुड़े कारीगरों को भी टूलकिट प्रदान की गई। सरकार के मुताबिक ऐसी योजनाओं का उद्देश्य पारंपरिक हुनर को स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसरों में बदलना है।
