उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बजट खर्च की गति तेज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नवंबर तक बजट की कम से कम 70 प्रतिशत वित्तीय स्वीकृतियां जारी होनी चाहिए और कुल बजट का न्यूनतम 60 प्रतिशत खर्च सुनिश्चित किया जाए।
समयबद्ध उपयोग पर मुख्यमंत्री का जोर
रविवार को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की मौजूदगी में हुई समीक्षा बैठक में बजट स्वीकृतियों और वास्तविक व्यय की स्थिति पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट का उद्देश्य केवल धनराशि आवंटित करना नहीं है, बल्कि उसका समय पर उपयोग कर योजनाओं का लाभ जनता तक पहुंचाना भी जरूरी है। उन्होंने धीमी गति वाले विभागों में तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
30 प्रमुख विभागों की समीक्षा
बैठक में प्रदेश के अधिक बजट वाले 30 प्रमुख विभागों के कामकाज और वित्तीय प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री को विभागीय मंत्रियों के साथ नियमित रूप से बजट खर्च की समीक्षा करने को कहा। जिन विभागों में स्वीकृतियां जारी करने या धनराशि खर्च करने में अड़चनें हैं, उन्हें दूर करने के निर्देश दिए गए।
अब तक कितनी धनराशि स्वीकृत
अधिकारियों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 का उत्तर प्रदेश का कुल बजट 9,99,056.48 करोड़ रुपये है। इसमें विकास योजनाओं के लिए 5,01,957.09 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अब तक 5,15,918.44 करोड़ रुपये यानी करीब 51.6 प्रतिशत की वित्तीय स्वीकृतियां जारी हो चुकी हैं। वहीं वास्तविक व्यय 2,83,870.11 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है।
वित्त विभाग को रिपोर्ट देने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने वित्त विभाग के अधिकारियों को बजट स्वीकृतियों और खर्च की प्रगति की नियमित रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों से फील्ड में जाकर विकास कार्यों की स्थिति देखने को भी कहा गया है। जहां योजनाओं की गति धीमी है, वहां संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कदम उठाने होंगे।
किसानों की मैपिंग पर भी फोकस
समीक्षा बैठक में किसानों को बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ने का मुद्दा भी उठा। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक गांव में किसानों की मैपिंग कराने और पात्र किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से जोड़ने के निर्देश दिए। ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण की उपलब्धता बढ़ाने के लिए ‘रूरल क्रेडिट कॉन्क्लेव’ आयोजित करने की योजना बनाने को भी कहा गया।
जीआई उत्पादों की ब्रांडिंग पर जोर
स्थानीय उत्पादों और शिल्प को बाजार उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री ने एमएसएमई विभाग को जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की ब्रांडिंग और व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए। इससे प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने और उनकी पहचान मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
गुणवत्ता और जवाबदेही पर सख्ती
मुख्यमंत्री ने विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने को कहा। निर्देशों के अनुसार कार्यों में अनावश्यक देरी या गुणवत्ता में कमी मिलने पर संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। नवंबर तक तय वित्तीय लक्ष्यों को हासिल करना अब विभागों के लिए प्रमुख प्रशासनिक लक्ष्य रहेगा।
