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कुशीनगर में नारायणी नदी का कहर, एपी तटबंध टूटा; CM योगी ने आधी रात में संभाला मोर्चा

UP CM Yogi Adityanath
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उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच सोमवार देर रात एपी तटबंध का एक हिस्सा टूट गया। सेवरही क्षेत्र के जवहीं दयाल गांव के ततवा टोला के सामने करीब 20 फुट तटबंध टूटने से आसपास के कई गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक छह से अधिक गांवों की करीब 20 हजार आबादी प्रभावित हुई है।

देर रात मुख्यमंत्री ने ली स्थिति की जानकारी

तटबंध टूटने की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने गोरखपुर मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों और कुशीनगर के जिलाधिकारी से घटना की जानकारी लेकर तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए। प्रभावित ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ को मोर्चे पर लगाया

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर सक्रिय हो गईं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी बचाव कार्य में लगाया गया। प्रशासन का फोकस बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और तटबंध के कमजोर हिस्सों को और नुकसान से बचाने पर है।

कई गांवों में तेजी से पहुंचा पानी

तटबंध टूटने के बाद गौरहा, सिसवा, बाघाचौर, बाकखास, चैनपट्टी, आवपुर और भगवानपुर समेत कई गांव प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों में अफरा-तफरी की स्थिति बनी। इससे पहले भी क्षेत्र में तटबंध पर रिसाव और कटान का दबाव देखा गया था। बचाव दल जियोबैग और बोल्डर के जरिए कमजोर हिस्सों को सुरक्षित करने में जुटे थे।

नेपाल और बैराज से बढ़ा नदी का दबाव

कुशीनगर में बाढ़ की स्थिति के पीछे नारायणी और गंडक नदी के बढ़े जलस्तर को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इससे पहले नेपाल में भारी बारिश के कारण नारायणी नदी का डिस्चार्ज बढ़ने की सूचना थी। वाल्मीकि बैराज और नेपाल के देवघाट से बड़े पैमाने पर पानी के प्रवाह के कारण भी सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ा।

पहले से जारी था बाढ़ का अलर्ट

कुशीनगर में नारायणी नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन पहले से ही तटबंधों की निगरानी कर रहा था। संवेदनशील गांवों में लोगों को सतर्क रहने के लिए लाउडस्पीकर के जरिए सूचना दी जा रही थी। प्रशासन की टीमें तटबंधों के कमजोर हिस्सों पर लगातार नजर बनाए हुए थीं।

ग्रामीणों की सुरक्षा बनी प्राथमिकता

बाढ़ के बीच प्रशासन का मुख्य लक्ष्य जनहानि को रोकना और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है। इससे पहले कुशीनगर में बढ़ते जलस्तर के कारण बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए थे और कुछ लोगों को तटबंधों तथा ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया गया था।

राहत और बचाव अभियान जारी

तटबंध टूटने के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। अधिकारियों को मौके पर रहकर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं बचाव टीमें लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ तटबंध के बचे हिस्से को सुरक्षित करने में जुटी हैं। आने वाले समय में नदी के जलस्तर और पानी के प्रवाह के आधार पर स्थिति में बदलाव की निगरानी की जा रही है।