उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। दोनों राज्यों के बीच अंतरराज्यीय बस सेवाओं के विस्तार पर सहमति बनी है। सोमवार को दोनों प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक में 25 बस रूटों के विस्तार और नई सेवाएं शुरू करने पर सहमति बनी। बैठक का उद्देश्य दोनों राज्यों के लोगों को बेहतर, सुविधाजनक और सुगम परिवहन उपलब्ध कराना है।
परिवहन मंत्रियों ने की महत्वपूर्ण चर्चा
बैठक में बिहार के परिवहन मंत्री दामोदर रावत और उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह मौजूद रहे। इसके अलावा अपर मुख्य सचिव परिवहन अर्चना अग्रवाल, परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन, रोडवेज प्रबंध निदेशक पीएन सिंह और बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के प्रशासक अतुल कुमार वर्मा समेत कई अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने दोनों राज्यों के बीच मौजूदा बस सेवाओं की स्थिति और भविष्य में किए जाने वाले विस्तार पर विस्तार से चर्चा की।
सीमावर्ती जिलों को मिलेगा बड़ा फायदा
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों को मिलने की उम्मीद है। दोनों राज्यों ने ऐसे क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है, जहां यात्रियों को वर्तमान में सीमित सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का सामना करना पड़ता है। नई बस सेवाएं शुरू होने से नौकरी, व्यापार, शिक्षा और अन्य जरूरी कार्यों के लिए दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी।
किराए में एकरूपता लाने पर भी जोर
बैठक में बस किराए को लेकर भी महत्वपूर्ण सहमति बनी है। दोनों राज्यों के बीच संचालित सेवाओं में किराए की व्यवस्था को अधिक एकरूप बनाने का प्रयास किया जाएगा। इससे यात्रियों को अलग-अलग नियमों और किराए को लेकर होने वाली परेशानियों से राहत मिल सकती है। नए मार्गों का परीक्षण कर समतुल्य किलोमीटर के आधार पर परिवहन समझौते को आगे बढ़ाया जाएगा।
नए राजमार्गों को भी जोड़ा जाएगा
पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच कई नए राजमार्ग और सड़क मार्ग विकसित हुए हैं। इन नए मार्गों को अंतरराज्यीय बस नेटवर्क में शामिल करने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। बिहार की ओर से उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए नई बस सेवाएं संचालित करने का अनुरोध किया गया है। दोनों राज्यों के अधिकारी इन मार्गों का परीक्षण कर आगे की प्रक्रिया तय करेंगे।
यात्रियों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी
अंतरराज्यीय परिवहन समझौता वर्ष 2016 से प्रभावी है और इसे मई 2026 में आगे बढ़ाया गया था। अब इसके तहत बस नेटवर्क को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। दोनों राज्यों के बीच बेहतर बस कनेक्टिविटी से यात्रियों को निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक संपर्क को भी बढ़ावा मिलेगा।
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