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राम मंदिर दान विवाद: SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी

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अयोध्या स्थित राम मंदिर से जुड़े कथित दान विवाद को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। यह मामला पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप लगाए गए हैं कि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और वित्तीय प्रबंधन में कुछ अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठ रही थी।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

विवाद उस समय सामने आया जब विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि राम मंदिर में प्राप्त दान राशि के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। बढ़ते विवाद को देखते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं निष्पक्ष जांच की मांग की, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया।

सात दिनों में तैयार की गई प्रारंभिक रिपोर्ट

जांच समिति में वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस और वित्तीय अधिकारियों को शामिल किया गया था। सरकार ने समिति को सात दिनों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और पंद्रह दिनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसी क्रम में SIT ने मंदिर परिसर का दौरा किया, संबंधित दस्तावेजों की जांच की और कई अधिकारियों तथा कर्मचारियों से पूछताछ की। प्रारंभिक रिपोर्ट अब मुख्यमंत्री को सौंप दी गई है, जबकि विस्तृत अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पारदर्शिता का दिया भरोसा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और सत्य को सामने लाया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना किसी प्रमाण के अफवाहों पर विश्वास न करें तथा जांच प्रक्रिया पूरी होने तक धैर्य बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे उसका पद कितना भी बड़ा क्यों न हो।

अंतिम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

राम मंदिर देश की आस्था का प्रमुख केंद्र है और करोड़ों श्रद्धालु इससे भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में दान राशि से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता के आरोप बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। अब सभी की निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।