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भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरे क्रिकेट की दुनिया के लिए एक बड़ा नाम रहे हैं। धोनी भारत के इकलौते ऐसे कप्तान है जिन्होंने आईसीसी की तीनों ट्रॉफियां भारत को जिताई है। हालांकि धोनी ने करीब 15 साल के लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के बाद साल 2020 में क्रिकेट की दुनिया को अलविदा कहा था।

इसी बीच पूर्व भारतीय खिलाड़ी सभा करीब ने धोनी को लेकर के एक बड़ा खुलासा किया है उन्होंने बताया है कि किस तरह धोनी का चयन भारतीय टीम के लिए हुआ था।

सबा करीम ने किया बड़ा खुलासा

भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी और सिलेक्ट रह चुके सबा करीम ने धोनी को लेकर के कई सारे बड़े खुलासे किए हैं। उन्होंने जिओसिनेमा पर बातचीत करते हुए बताया है कि किस तरीके से धोनी का चयन भारतीय टीम में हुआ। उन्होंने कहा कि,

“मेरी कहानी बहुत दिलचस्प है. जब मैं धोनी से मिला था, वो उसका रणजी में दूसरी साल था. वह बिहार के लिए खेला करे थे. मैंने उसे बैटिंग करते देखा, और मुझे अभी भी याद है कि जब वह बल्लेबाजी कर रहा था, तो उसके पास वह शानदार प्रतिभा थी जो हमने बाद में भी देखी, एक स्पिनर या तेज गेंदबाज को बड़े लॉफ्टेड शॉट्स खेलते हुए. यहां तक कि विकेटकीपिंग के लिए भी जो फुटवर्क होना चाहिए था, उसमें थोड़ी कमी थी.”

धोनी के करियर का अहम मोड़ था

सबा करीम यहीं नहीं रुके उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाया और कहा कि,

“हमने उस समय इस पर उनके साथ काम किया था और उन्हें अभी भी याद है कि उन्हें तब क्या सिखाया गया था. जब हम बात किया करते थे, तो वह इसके बारे में बात करते थे. यह एमएस के करियर में एक अहम मोड़ था जहां वह वाकई में आगे बढ़ रहे थे. वनडे में हमने उन्हें पारी की शुरूआत करने दी क्योंकि उसकी बल्लेबाजी काफी मजबूत थी और वे तेजी से रन बनाते थे.”

इस तरह से हुआ टीम में धोनी का चयन

सबा करीम ने अपनी बातों में यह भी बताया कि धोनी का चयन टीम इंडिया में कैसे हुआ उन्होंने कहा कि,

“दूसरा टर्निंग प्वाइंट भारत ‘ए’, पाकिस्तान ‘ए’ और केन्या के बीच केन्या में ट्राई सीरीज़ थी. धोनी को इसलिए खेलने को मिला क्योंकि दिनेश कार्तिक नेशनल टीम के साथ जुड़ रहे थे. जहां धोनी ने अच्छी विकेटकीपिंग की और बल्लेबाज़ी के लिए मत पूछो! हमने पाकिस्तान ए के खिलाफ दो बार खेला और उन्होंने सीरीज़ में अच्छी बल्लेबाज़ी की.”

“वहां से यह उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट था और इसके बाद उनका नाम चर्चा में रहा. मुझे यह भी याद है कि मैं उस वक़्त कोलकाता में था और सौरव गांगुली कप्तान थे. मैं उनसे मिलना चहाता था और बताना चहाता था कि एक कीपर है जिसे इंडियन टीम में आना चाहिए क्योंकि वह शानदार बैटिंग कर रहा था और सेफ कीपर था. दुर्भाग्य से, सौरव ने पाकिस्तान दौरे से ठीक पहले एमएस को खेलते हुए नहीं देखा था और उन्हें उस दौरे के लिए नहीं चुना गया था.”

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