उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी लखनऊ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग में खेल कोटे से चयनित 470 युवाओं को आधिकारिक रूप से नियुक्ति-पत्र वितरित किए। इनमें 43 उप निरीक्षक (SI) और 427 आरक्षी (Constable) शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त पुलिसकर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि पारदर्शी चयन प्रक्रिया के तहत मिलने वाली यह सफलता किसी की कृपा या अनुकंपा नहीं, बल्कि युवाओं के अपने पसीने और कठोर परिश्रम का वास्तविक परिणाम है।
राजनीतिक कटाक्ष: परिवारवाद और सिफारिश पर प्रहार
विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में सरकारी नौकरियों पर एक खास परिवार का कब्जा रहता था और नौकरी पाने के लिए केवल दो ही रास्ते होते थे—या तो ‘सैफई’ या फिर ‘सिफारिश’। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहले की व्यवस्था ‘प्रदेश डुबाऊ अलायंस’ जैसी थी, जबकि वर्तमान एनडीए सरकार ‘नौकरी देंगे अलायंस’ के रूप में पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है। अब चयन में भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं बची है।
युवाओं के लिए विशेष संदेश और खेल का महत्व
संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने युवाओं को सोशल मीडिया की आभासी दुनिया और रील्स के अत्यधिक प्रयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रील्स देखने से केवल क्षणिक ‘लाइक्स’ मिलते हैं, जबकि खेल का मैदान और कड़ी मेहनत जीवन को एक सही दिशा और नई ‘लाइफ’ देती है। उन्होंने पुलिस बल में शामिल हुए खिलाड़ियों से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा और खेल भावना का सकारात्मक उपयोग करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं और नशे जैसी बुराइयों के खिलाफ युवाओं को प्रेरित करें।
पारदर्शी और निष्पक्ष शासन का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की पहचान अपराध, दंगों और घोटालों के रूप में होती थी, लेकिन आज राज्य के युवा खेल के मैदान में मेडल जीतकर देश और दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। सरकार खेल और खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार कई बड़े कदम उठा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी भ्रष्ट तंत्र को बख्शा नहीं जाएगा और राज्य सरकार हर योग्य युवा को रोजगार देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
