असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने हाल ही में “पंचायत आजतक असम” कार्यक्रम में राजनीति, चुनाव और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य कांग्रेस में मौजूद हिंदू नेताओं और कार्यकर्ताओं को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ जोड़ना है। उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है और इसे आने वाले चुनावों की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
कार्यक्रम में बोलते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पार्टी की विचारधारा पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि कांग्रेस की नीतियों से कई हिंदू नेता असहज महसूस करते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसे नेताओं और समर्थकों को भाजपा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
सरमा ने यह भी कहा कि भाजपा की राजनीति राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक पहचान और विकास के मुद्दों पर आधारित है। उनके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति इन मूल्यों से सहमत है तो उसे भाजपा के साथ आना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि वे कांग्रेस में मौजूद हिंदू नेताओं को भाजपा से जोड़ने की कोशिश करेंगे।
असम की राजनीति और चुनावी रणनीति
असम में भाजपा पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुई है। 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया और राज्य में सरकार बनाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरमा का यह बयान आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर दिया गया है।
भाजपा की रणनीति यह रही है कि वह विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ाए। सरमा पहले भी कह चुके हैं कि राज्य में कई समुदाय भाजपा की नीतियों से प्रभावित होकर पार्टी का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश भी भाजपा की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
सरमा के इस बयान पर विपक्षी दलों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं आई हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा समाज को धार्मिक आधार पर बांटने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप है कि भाजपा चुनावी लाभ के लिए धार्मिक पहचान को मुद्दा बना रही है।
हालांकि भाजपा का कहना है कि उनकी राजनीति विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव पर आधारित है और हर नागरिक को पार्टी में शामिल होने का स्वागत है।
