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झारखंड में टेंडर नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी: 10% से ज्यादा ‘बिलो’ रेट पर बोली लगाने पर लग सकता है प्रतिबंध

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झारखंड में सरकारी निर्माण कार्यों और विकास योजनाओं की टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी व गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए हेमंत सोरेन सरकार नियमों में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। सरकार तय दर से 10 प्रतिशत से अधिक कम (Below) दर पर बोली लगाने पर रोक लगाने की तैयारी में है। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक के दौरान मंत्रियों द्वारा यह विषय उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की समग्र समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। यह कमेटी 15 दिनों के भीतर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।

कैबिनेट बैठक में उठा मुद्दा: गुणवत्ता पर असर का तर्क

संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी दी कि सरकारी योजनाओं में अत्यधिक कम दर पर बोली लगाने की प्रवृत्ति को लेकर मंत्रियों ने चिंता जताई:

गुणवत्ता से समझौता: मंत्रियों का तर्क था कि तय प्राक्कलन (Estimate) से बहुत अधिक कम दर पर टेंडर लेने से ठेकेदार निर्माण सामग्री और कार्यों की गुणवत्ता से समझौता करते हैं।

रोक लगाने की मांग: मंत्रियों ने मांग की कि 10 फीसदी से अधिक बिलो पर टेंडर लेने की व्यवस्था को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए, ताकि काम तय मानकों और मजबूती के साथ पूरा हो सके।

सीएम का निर्देश: मुख्यमंत्री ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञों और अधिकारियों की उच्चस्तरीय कमेटी गठित करने का आदेश दिया, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर कैबिनेट अंतिम नीतिगत फैसला लेगी।

मंत्री इरफान अंसारी बोले: “40% तक कम दर पर टेंडर लेकर बाद में रिवाइज कराने का खेल”

कैबिनेट मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:

कई बार ठेकेदार प्रतिस्पर्द्धा में 35 से 40 फीसदी तक कम दर पर टेंडर हासिल कर लेते हैं।

बाद में काम अधूरा छोड़कर या अधिकारियों के साथ साठगांठ कर दर में संशोधन (Revision) कराने का प्रयास किया जाता है।

इससे न केवल निर्माण कार्य घटिया स्तर का होता है, बल्कि सरकारी राजस्व और खजाने को भी भारी नुकसान पहुंचता है।

उन्होंने जोर दिया कि टेंडर प्रक्रिया में न्यूनतम बोली की एक निश्चित सीमा (Cap) तय करना अत्यंत आवश्यक है।

15 दिनों में आएगी रिपोर्ट, उसके बाद लागू होगा नियम

फिलहाल 10 फीसदी से ज्यादा कम पर बोली लगाने पर रोक लगाने का कोई अंतिम आदेश लागू नहीं हुआ है। सरकार की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति 15 दिनों में अन्य राज्यों के नियमों, सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) मानकों और स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी, जिसके बाद झारखंड के सरकारी टेंडर नियमों में विधिवत संशोधन किया जाएगा।