लंबे समय से लंबित झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) बोर्ड के पूर्ण गठन की प्रक्रिया अब तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (जो स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रभारी मंत्री भी हैं) ने जैक के उपाध्यक्ष और 13 सदस्यों की नियुक्ति व मनोनयन के प्रस्ताव पर अपनी औपचारिक सहमति दे दी है। मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद संबंधित संचिका (फाइल) विभाग को वापस प्राप्त हो गई है और विभाग ने नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
लंबे समय से खाली चल रहे थे पद
जैक बोर्ड में शीर्ष पदों और सदस्यों के रिक्त रहने से प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों पर असर पड़ रहा था:
उपाध्यक्ष का पद: जैक उपाध्यक्ष का पद 9 फरवरी 2025 से रिक्त चल रहा है।
सदस्यों के 13 पद: बोर्ड के 13 मनोनीत सदस्यों के पद 15 मई 2026 से खाली पड़े हैं।
शीघ्र जारी होगा विज्ञापन: सरकार द्वारा निर्धारित अर्हताओं के आधार पर योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित करने के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग शीघ्र ही सार्वजनिक विज्ञापन प्रकाशित करेगा।
झारखंड हाई कोर्ट में जनहित याचिका के बाद बढ़ी हलचल
बोर्ड के गठन में हो रही देरी को लेकर सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक एवं सामाजिक कार्यकर्ता राजनंदन महतो ने झारखंड हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी।
याचिका में उठाए गए प्रमुख बिंदु:
जैक बोर्ड का विधिवत और पूर्ण गठन न होने के कारण वैधानिक प्रक्रियाओं में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।
बिना विधिवत वित्त समिति की अनुशंसा के काउंसिल के फंड से खर्च किए जाने का आरोप लगाया गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि जैक में पदस्थापित वित्त पदाधिकारी और एकेडमिक ऑफिसर अवैध रूप से कार्य कर रहे हैं, जिन्हें हटाया जाना चाहिए।
मामले में राज्य सरकार, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, जैक अध्यक्ष और जैक सचिव को प्रतिवादी बनाया गया है।
विधानसभा में भी पूर्व में जैक बोर्ड के गठन का मुद्दा उठाया गया था, जहां सरकार की ओर से जल्द आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया था। अब मुख्यमंत्री की हरी झंडी मिलने के बाद उम्मीद है कि जैक बोर्ड का सांगठनिक ढांचा जल्द ही पूरी तरह बहाल हो जाएगा।
