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अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ बनने की कहानी, गुरु महंत अवैद्यनाथ से ऐसे जुड़ा रिश्ता

CM Yogi Adityanath Gorakhpur BJP
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गुरु और गोरक्षपीठ के पूर्व पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ की 12वीं पुण्यतिथि 30 सितंबर को मनाई जा रही है। गोरखनाथ मंदिर में सप्ताहभर से चल रहे श्रद्धांजलि कार्यक्रम का समापन इसी दिन होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। महंत अवैद्यनाथ का योगी आदित्यनाथ के आध्यात्मिक और सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

अजय सिंह बिष्ट के रूप में जन्म

योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र के पंचूर गांव में अजय सिंह बिष्ट के रूप में हुआ। उन्होंने विज्ञान विषय से स्नातक की पढ़ाई की। छात्र जीवन के दौरान उनका जुड़ाव सामाजिक और छात्र गतिविधियों से हुआ। बाद में उनके जीवन की दिशा गोरखपुर और गोरक्षपीठ से जुड़ती गई।

22 वर्ष की उम्र में घर छोड़ा

उपलब्ध जीवनी विवरण के अनुसार अजय सिंह बिष्ट ने करीब 22 वर्ष की उम्र में सांसारिक जीवन छोड़कर संन्यास का मार्ग अपनाया और गोरखपुर पहुंचे। यहीं उनका संपर्क गोरक्षपीठ के तत्कालीन पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ से हुआ। एनडीटीवी की पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, अजय सिंह बिष्ट ने महंत अवैद्यनाथ को अपना गुरु बनाया और उनके साथ गोरक्षपीठ से जुड़ गए।

गुरु से मिला मार्गदर्शन

महंत अवैद्यनाथ ने अजय सिंह बिष्ट को आध्यात्मिक जीवन के साथ सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारियों के लिए भी तैयार किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा की वेबसाइट पर योगी आदित्यनाथ के परिचय में महंत अवैद्यनाथ को उनके गुरु के रूप में दर्ज किया गया है। योगी आदित्यनाथ की आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, 15 फरवरी 1994 को गोरखनाथ मंदिर परिसर में उनका दीक्षाभिषेक हुआ और उन्हें गोरक्षपीठ का उत्तराधिकारी घोषित किया गया।

राजनीति में भी मिली नई भूमिका

गोरक्षपीठ से जुड़ने के बाद योगी आदित्यनाथ का सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन भी आगे बढ़ा। 1998 में उन्होंने गोरखपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और 26 वर्ष की उम्र में सांसद बने। इसके बाद उन्होंने 1999, 2004, 2009 और 2014 में भी गोरखपुर से लोकसभा चुनाव जीता। इस तरह वह लगातार पांच बार लोकसभा सदस्य रहे।

2014 में महंत अवैद्यनाथ का निधन

महंत अवैद्यनाथ का निधन सितंबर 2014 में हुआ। उनके निधन के बाद गोरक्षपीठ की जिम्मेदारी योगी आदित्यनाथ ने संभाली। महंत अवैद्यनाथ धार्मिक गतिविधियों के साथ शिक्षा और सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे। उन्होंने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के विस्तार में भूमिका निभाई और सामाजिक समरसता से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया।

गुरु की विरासत और योगी की भूमिका

महंत अवैद्यनाथ की विरासत में धार्मिक परंपरा, शिक्षा, सामाजिक गतिविधियां और सार्वजनिक जीवन शामिल रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने अपने गुरु की स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों में उनके योगदान को याद किया है। 30 सितंबर को गोरखनाथ मंदिर में होने वाली श्रद्धांजलि सभा में संतों और धार्मिक नेताओं की मौजूदगी के बीच मुख्यमंत्री अपने गुरु को श्रद्धांजलि देंगे।

गुरु-शिष्य संबंध की चर्चा

अजय सिंह बिष्ट से योगी आदित्यनाथ तक का सफर गोरक्षपीठ से उनके जुड़ाव के साथ आगे बढ़ा। महंत अवैद्यनाथ के मार्गदर्शन में उन्होंने संन्यासी जीवन अपनाया और बाद में सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हुए। आज भी महंत अवैद्यनाथ को योगी आदित्यनाथ के आध्यात्मिक गुरु और गोरक्षपीठ की परंपरा में उनके पूर्ववर्ती के रूप में याद किया जाता है।