उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल की जन्मशताब्दी वर्ष के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर आंदोलन, अयोध्या और विपक्षी दलों की भूमिका को लेकर कई राजनीतिक टिप्पणियां कीं। कार्यक्रम में अशोक सिंहल के जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई।
कांग्रेस-सपा की गैरमौजूदगी पर सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राम मंदिर के शिलान्यास और रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं को निमंत्रण दिया गया था, लेकिन वे शामिल नहीं हुए। उन्होंने इसकी वजह को लेकर विपक्ष पर राजनीतिक आरोप लगाए और कहा कि इन दलों को वोटबैंक की चिंता थी। यह मुख्यमंत्री द्वारा कार्यक्रम में किया गया राजनीतिक दावा है।
‘जालीदार टोपी’ वाले बयान से सियासी चर्चा
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और सपा की अनुपस्थिति को लेकर ‘जालीदार टोपी’ का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को डर था कि मंदिर कार्यक्रम में शामिल होने से उनका राजनीतिक वोटबैंक प्रभावित हो सकता है। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद बयान को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
राम मंदिर आंदोलन में अशोक सिंहल की भूमिका
मुख्यमंत्री ने अशोक सिंहल के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। योगी ने बताया कि उनके गुरु महंत अवेद्यनाथ भी राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति से जुड़े रहे थे और आंदोलन से संबंधित बैठकों में अशोक सिंहल की सक्रिय भूमिका थी।
अयोध्या में बदलाव का किया जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में अयोध्या में हुए विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या में दीपोत्सव आयोजित होता है और रामपथ, धर्मपथ, भक्ति पथ तथा जन्मभूमि पथ जैसी परियोजनाओं का विकास हुआ है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और श्रद्धालुओं के लिए विकसित सुविधाओं का भी जिक्र किया।
रामकाज में ‘कालनेमि’ की चेतावनी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ‘कालनेमि’ का संदर्भ देते हुए राम मंदिर से जुड़े कार्यों में सतर्क रहने की बात कही। उन्होंने समर्थकों से कहा कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों से जुड़े कार्यों में ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है, जो उनके अनुसार अलग उद्देश्य लेकर शामिल हो सकते हैं। यह टिप्पणी उनके भाषण का हिस्सा थी।
गोसेवा और सरकारी नीतियों का उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण व्यवस्था का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 7,700 से अधिक गोशालाएं हैं और करीब 16 लाख गायों का संरक्षण किया जा रहा है। उन्होंने प्रति गाय प्रतिमाह 1,500 रुपये की सहायता दिए जाने की बात भी कही। ये आंकड़े मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में दिए गए बयान पर आधारित हैं।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच बढ़ी चर्चा
राम मंदिर से जुड़े कार्यक्रमों में विपक्षी दलों की भागीदारी और उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर अलग-अलग समय पर बहस होती रही है। लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी मुद्दे को अपने संबोधन का हिस्सा बनाया। उनके बयान के बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ओर से आने वाली प्रतिक्रियाओं पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।
