राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्पियों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने संत कबीर राज्य स्तरीय हथकरघा पुरस्कार प्रदान करते हुए बुनकर समुदाय के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हथकरघा केवल रोजगार का साधन नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने वाला माध्यम भी है।
स्वदेशी आंदोलन से जुड़ा है 7 अगस्त का महत्व
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 7 अगस्त 1905 को स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी, जिसने देशवासियों में स्वदेशी वस्तुओं के प्रति विश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत किया। हथकरघा क्षेत्र ने उस दौर में भी देश की आर्थिक और सामाजिक चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के माध्यम से इसी विरासत और कारीगरों के योगदान को सम्मान दिया जाता है।
यूपी की पहचान हैं बनारसी साड़ी और चिकनकारी
उत्तर प्रदेश हथकरघा और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है। बनारसी रेशम की साड़ियां, लखनऊ की चिकनकारी, भदोही के कालीन और मऊ, टांडा तथा मुबारकपुर के हथकरघा उत्पाद प्रदेश की विशेष पहचान हैं। इन पारंपरिक उत्पादों से बड़ी संख्या में परिवारों को रोजगार मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक हाथ से बुने कपड़े के पीछे किसी कारीगर की मेहनत, कौशल और वर्षों का अनुभव जुड़ा होता है। इसलिए इस क्षेत्र को मजबूत करना सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए भी जरूरी है।
बुनकरों को आधुनिक बाजार से जोड़ने पर जोर
सरकार की ओर से हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और नई डिजाइन से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनकरों को केवल पुरस्कार और सम्मान देने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उनके उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था भी जरूरी है। तकनीक और आधुनिक विपणन के माध्यम से पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ाई जा सकती है। इससे युवा पीढ़ी भी इस व्यवसाय से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित होगी।
हथकरघा से लाखों लोगों को रोजगार
मुख्यमंत्री के अनुसार उत्तर प्रदेश में हथकरघा और पावरलूम क्षेत्र करीब 30 लाख लोगों की आजीविका का आधार बन चुका है। ऐसे में इस क्षेत्र का विकास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। सरकार का प्रयास है कि बुनकरों को तकनीकी सहायता, बाजार उपलब्धता और सम्मान के साथ आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलें। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर हुए सम्मान समारोह ने प्रदेश के कारीगरों के योगदान को नई पहचान देने के साथ स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया।
