उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली खपत के बीच राज्य ने 31,824 मेगावाट की रिकॉर्ड बिजली मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया। यह अब तक का राज्य का सबसे बड़ा पावर सप्लाई रिकॉर्ड माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने महाराष्ट्र को भी पीछे छोड़ दिया है, जो लंबे समय से देश के बड़े बिजली उपभोक्ता राज्यों में गिना जाता रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार, 24 मई की रात 10:29 बजे यह रिकॉर्ड दर्ज किया गया। इससे पहले वर्ष 2025 में राज्य की सबसे अधिक बिजली मांग 31,486 मेगावाट रही थी। लगातार बढ़ती गर्मी और एसी, कूलर तथा अन्य उपकरणों के इस्तेमाल के बावजूद बिजली व्यवस्था को स्थिर बनाए रखना सरकार और ऊर्जा विभाग के लिए बड़ी चुनौती थी।
महाराष्ट्र से आगे निकला उत्तर प्रदेश
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जिस समय उत्तर प्रदेश ने 31,824 मेगावाट बिजली आपूर्ति की, उसी दौरान महाराष्ट्र लगभग 29,463 मेगावाट की मांग पूरी कर पाया। इस तरह उत्तर प्रदेश देश में सबसे अधिक बिजली उपलब्ध कराने वाला राज्य बन गया। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की सरकार ने इसे राज्य के ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी सफलता बताया है।
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में निर्बाध बिजली पहुंचाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य हर गांव, शहर और घर तक गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना है।
ग्रामीण इलाकों को भी मिला फायदा
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में भी औसतन 22 से 22.5 घंटे बिजली दी गई, जबकि तय रोस्टर केवल 18 घंटे का है। इससे किसानों, व्यापारियों और आम लोगों को काफी राहत मिली है। वहीं बुंदेलखंड जैसे इलाकों में भी बिजली कटौती बेहद कम रही।
सरकार ने दावा किया कि महानगरों, तहसीलों, नगर पंचायतों और औद्योगिक क्षेत्रों में लगभग 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई। अधिकारियों और कर्मचारियों को युद्ध स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि गर्मी के मौसम में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
भविष्य के लिए बड़ा संकेत
ऊर्जा विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं बल्कि राज्य के तेजी से विकसित होते इंफ्रास्ट्रक्चर का संकेत है। लगातार बढ़ती आबादी और औद्योगिक गतिविधियों के बावजूद इतनी बड़ी बिजली मांग को पूरा करना आसान नहीं होता। आने वाले समय में यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।
