उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मथुरा के वृंदावन में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान सनातन समाज से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि सभी सनातनी एकजुट होकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करें, तो किसी भी प्रकार की साजिश या राष्ट्र-विरोधी ताकतें देश को नुकसान नहीं पहुंचा सकतीं।
यह कार्यक्रम संत शिरोमणि मालूकदास जी महाराज की जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर एकता को सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए समाज को संगठित रहने का संदेश दिया।
राम मंदिर आंदोलन का उदाहरण
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने अपने संबोधन में अयोध्या में बने राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सनातन समाज की एकजुटता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जब संत समाज एक मंच पर आया, तो 500 वर्षों पुराना विवाद समाप्त हुआ और भव्य मंदिर का निर्माण संभव हो सका।
उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब समाज एकजुट हुआ है, तब-तब बड़े परिवर्तन संभव हुए हैं। इसलिए वर्तमान समय में भी एकता बनाए रखना बेहद जरूरी है।
‘सनातन धर्म राष्ट्र की आत्मा’
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति और पहचान का आधार है। उन्होंने संतों और धार्मिक गुरुओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के हित में काम करना ही सनातन परंपरा का मूल संदेश है।
Yogi Adityanath ने विकास और विरासत दोनों पर दिया जोर
Yogi Adityanath ने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने काशी और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों के विकास का जिक्र करते हुए बताया कि आज ये स्थान वैश्विक स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
उनका कहना था कि “विकास और विरासत” दोनों को साथ लेकर चलना ही सरकार की प्राथमिकता है, जिससे देश की पहचान और मजबूत हो सके।
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