उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 22 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण घोषणा की कि प्रदेश में स्कूलों से छात्रों के ड्रॉप आउट (पढ़ाई छोड़ने) के मामले में सबसे बड़ा कारण छात्राओं के लिए अलग शौचालय की कमी थी। उन्होंने कहा कि पहले केवल स्कूल के भवन बनाने पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की अनुपस्थिति के कारण बच्चे पढ़ाई छोड़ने को मजबूर थे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही ये बात
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि जब तकनीकी डेटा का विश्लेषण किया गया, तो यह साफ़ हुआ कि छात्रों का स्कूल छोड़ने का कारण कुछ भी नहीं बल्कि लड़कियों के लिए अलग शौचालय और पेयजल की सुविधा का अभाव था। इसके कारण बहुत सी छात्राएँ स्कूल जाना कम कर देती थीं और अंततः पढ़ाई छोड़ देती थीं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक अभियान चलाया गया जिसमें हर स्कूल में लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग शौचालय और साफ़ पानी की व्यवस्था करवाई गई। इसके बाद प्रदेश में बेसिक एजुकेशन काउंसिल के तहत ड्रॉप-आउट रेट को लगभग शून्य तक लाने में सफलता मिली है।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले केवल विद्यालय खुलवाना काफी माना जाता था, लेकिन गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से परिणाम विपरीत रहे। उन्होंने यह उधाहण दिया कि कई गांवों में स्कूल तो थे, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण बच्चे विशेषकर लड़कियाँ स्कूल नहीं पहुंच पाती थीं।
क्या कहता है एनालिसिस?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लड़कियों के लिए अलग शौचालय की उपलब्धता स्कूल जाने की दर और नियमित उपस्थिति दोनों के लिए बेहद जरूरी है। जब विद्यालयों में साफ़-सुथरे और सुरक्षित शौचालय नहीं होते, तो खासकर किशोर छात्राएँ मासिक धर्म के दौरान स्कूल नहीं जा पातीं और धीरे-धीरे पढ़ाई से दूरी बना लेती हैं। भारत भर में इसी तरह की स्थितियों से जुड़े आँकड़े भी यह बात समर्थन करते हैं कि शौचालय की कमी उपस्थिति और ड्रॉप-आउट पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने इन नकारात्मक परिस्थितियों को बदलने के लिए स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाया है, जिसमें ** अलग-अलग शौचालय, पेयजल, और अन्य सुविधाएँ** शामिल हैं, जिससे छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया है।
इस कदम को शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल ड्रॉप-आउट दर में गिरावट आई है बल्कि छात्राओं की पढ़ाई में निरंतरता और सुरक्षा भी बढ़ी है!
उत्तर प्रदेश सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि लड़कियों के लिए अलग शौचालय की कमी ही स्कूल ड्रॉप-आउट का सबसे बड़ा कारण था, और उसे दूर कर प्रदेश में पढ़ाई छोड़ने की दर को बहुत कम किया गया है।
