भारत (Team India) को 2 आईसीसी विश्व कप और 1 चैम्पियंस ट्रॉफी जीताने वाले भारत के सबसे सफल कप्तान महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने 15 अगस्त 2020 को अचानक से सभी को हैरान करते हुए संन्यास का ऐलान कर दिया था. महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद भी आईपीएल में खेलना जारी रखा है.
क्रिकेट से संन्यास के बाद अक्सर ऐसा देखा जाता है कि क्रिकेटर कमेंट्री करना शुरू कर देते हैं, महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) के साथ क्रिकेट खेलने वाले सुरेश रैना, मोहम्मद कैफ, वीरेंद्र सहवाग जैसे दिग्गज खिलाड़ी अब कमेंट्री करते नजर आते हैं, भारतीय टीम का कोच बनने से पहले गौतम गंभीर भी कमेंट्री करते नजर आते थे. हालांकि महेंद्र सिंह धोनी ने कभी कमेंट्री नही की है. अब खुद माही ने इसके पीछे की वजह बताई है.
MS Dhoni ने बताया क्यों नही करते हैं कमेंट्री
महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने अब खुद इसके पीछे की वजह का खुलासा किया है. महेंद्र सिंह धोनी खुद को अच्छा कमेंटेटर नही मानते हैं. यूट्यूब पर स्पोर्ट्स ब्रॉडकास्टर जतिन सप्रू से बातचीत में भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा
“कमेंट्री बहुत मुश्किल काम है. मुझे लगता है कि खेल को बताने और उसी दौरान खिलाड़ियों की आलोचना करने के बीच बहुत पतली लाइन होती है. कई बार पता भी नहीं चलता और आप उस लाइन को पार कर जाते हैं.”
महेंद्र सिंह धोनी ने अपने बयान में आगे कहा कि
“कमेंट्री की सबसे बड़ी कला यह है कि आप अपनी बात कैसे रखते हैं. अगर कुछ गलत हो रहा है तो उसे कहना जरूरी है, लेकिन उसे इस तरह कहना भी जरूरी है कि किसी को बुरा न लगे. टीम अगर हार रही है तो उसके पीछे कारण होते हैं और उन कारणों को बिना किसी पर उंगली उठाए बताना ही असली कमेंट्री है.”
महेंद्र सिंह धोनी ने खुद को बताया क्रिकेट आंकड़ो में कच्चा
भारत को 2 विश्व कप ट्रॉफी जीताने वाले महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने कहा कि
“मैं आंकड़ों के मामले में अच्छा नहीं हूं. लेकिन बहुत लोग ऐसे हैं जिन्हें खिलाड़ियों के पूरे करियर के आंकड़े याद रहते हैं. अगर आप मुझसे मेरे ही आंकड़ों के बारे में पूछ लें, तो मैं भी सोच में पड़ जाऊंगा.”
महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) ने अपने बयान में आगे कहा कि
“मैं खुद को एक अच्छा श्रोता मानता हूं. मैं उन्हीं लोगों से खुलकर बात करता हूं जिनके साथ सहज महसूस करता हूं. वैसे मैं बोलने से ज्यादा सुनना पसंद करता हूं. अगर किसी विषय की मुझे पूरी जानकारी नहीं होती, तो मैं उस पर ज्यादा बोलता नहीं हूं, क्योंकि मुझे लगता है कि सुनने से ज्यादा सीखने को मिलता है.”
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