उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर सीएम योगी ने अपने संबोधन में 2017 से पहले की स्थिति पर सवाल उठाते हुए पुलिस और अपराध नियंत्रण का मुद्दा उठाया, वहीं अखिलेश यादव ने मौजूदा पुलिस व्यवस्था और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
योगी ने पुराने शासन पर उठाए सवाल
सीएम योगी आदित्यनाथ ने 1 अक्टूबर को कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में अपराध और माफिया के प्रभाव को लेकर लोगों में भय का माहौल था। उन्होंने दावा किया कि उस समय पुलिस के सामने भी कई चुनौतियां थीं। मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार के कार्यकाल की तुलना पूर्ववर्ती व्यवस्था से की। ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री के राजनीतिक संबोधन का हिस्सा थीं।
पुलिस की भूमिका पर अखिलेश का निशाना
अखिलेश यादव ने दूसरी ओर उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और आम लोगों का पुलिस पर भरोसा प्रभावित हुआ है। उनका यह भी दावा था कि अदालतों ने भी अलग-अलग मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ये आरोप अखिलेश यादव की ओर से लगाए गए राजनीतिक दावे हैं।
2027 से पहले कानून-व्यवस्था बना मुद्दा
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष प्रस्तावित हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था, पुलिस व्यवस्था और अपराध नियंत्रण राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो गए हैं। भाजपा और सपा दोनों ही अपने-अपने शासनकाल तथा मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर जनता के सामने अलग-अलग दावे रख रहे हैं।
भाजपा की ओर से संगठन पर जोर
भाजपा ने भी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक गतिविधियां तेज की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों की 3 और 4 अक्टूबर को मथुरा में बैठक प्रस्तावित है। इसमें बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक की समीक्षा किए जाने की बात सामने आई है।
सपा की चुनावी गतिविधियां भी तेज
समाजवादी पार्टी ने भी चुनावी तैयारियों के तहत अपनी गतिविधियां बढ़ाई हैं। अखिलेश यादव ने सितंबर में रायबरेली से PDA रथ यात्रा के जरिए पार्टी के चुनावी अभियान की शुरुआत की थी। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर भी अपनी बात रखी थी।
राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी
कानून-व्यवस्था को लेकर दोनों नेताओं के बयानों में उनके-अपने राजनीतिक दृष्टिकोण सामने आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी सरकार की मौजूदा व्यवस्था और 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख कर रहे हैं, जबकि अखिलेश यादव वर्तमान सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। दोनों पक्षों के दावों को उनके राजनीतिक संदर्भ में देखना जरूरी है।
चुनाव से पहले मुद्दों की लड़ाई
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में संगठन, कानून-व्यवस्था, विकास और प्रशासनिक कामकाज जैसे मुद्दों पर बहस आगे बढ़ने के संकेत हैं। आने वाले महीनों में दोनों प्रमुख दलों की ओर से अपने शासन और नीतियों को लेकर जनता के सामने अलग-अलग दावे और मुद्दे रखे जाने की संभावना है।
