Yogi Adityanath ने हाल ही में उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले राज्य दंगों, अराजकता और “गुंडा टैक्स” जैसी समस्याओं से जकड़ा हुआ था, जबकि अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। उनके अनुसार, आज प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है और अपराधियों में डर का माहौल है।
2017 से पहले की स्थिति: दंगे और अव्यवस्था
मुख्यमंत्री के मुताबिक, 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था गंभीर चुनौती बनी हुई थी। उस दौर में दंगे, संगठित अपराध और माफिया गतिविधियां आम बात थीं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2007 से 2017 के बीच राज्य में हजारों दंगे हुए और कई लोगों की जान गई।
राजनीतिक हस्तक्षेप और कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था के कारण पुलिस पर भी दबाव था। कई बार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई देखी जाती थी, जिससे आम जनता में असुरक्षा की भावना बढ़ती थी। यही कारण था कि राज्य की छवि एक “लॉलेस स्टेट” के रूप में बन गई थी।
योगी सरकार का दावा: बदली तस्वीर
2017 में सत्ता संभालने के बाद Yogi Adityanath ने कानून-व्यवस्था सुधार को प्राथमिकता दी। सरकार ने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाते हुए अपराध और माफिया के खिलाफ सख्त अभियान चलाया।
मुख्यमंत्री का दावा है कि अब प्रदेश में दंगे लगभग खत्म हो चुके हैं और अपराधियों के मन में कानून का डर है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस बल को मजबूत किया गया है और उसकी कार्यक्षमता बढ़ी है, जिससे कानून-व्यवस्था बेहतर हुई है।
पुलिस सुधार और सख्त कार्रवाई
सरकार ने पुलिस भर्ती, प्रशिक्षण और संसाधनों में भी बड़े बदलाव किए। लाखों नए पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई और आधुनिक तकनीकों को अपनाया गया। इसके अलावा, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई गई।
कुछ मामलों में “बुलडोजर कार्रवाई” और एनकाउंटर नीति को भी सरकार की सख्ती के रूप में देखा गया, जिसने अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश दिया।
आलोचना और बहस
हालांकि, सरकार के इन दावों पर विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने सवाल भी उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि सख्त कार्रवाई के साथ-साथ मानवाधिकारों का ध्यान रखना भी जरूरी है। कुछ मामलों में पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद भी सामने आए हैं।
