Yogi Adityanath सरकार ने ऊर्जा संरक्षण को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। बढ़ती वैश्विक परिस्थितियों और ईंधन की खपत को नियंत्रित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने सरकारी विभागों में बिजली और पेट्रोल-डीजल की बचत पर विशेष फोकस किया है। इसके तहत जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था को भी लागू करने की बात कही गई है।
सरकारी दफ्तरों में ऊर्जा बचत की तैयारी
राज्य सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि कार्यालयों में बिजली का इस्तेमाल सीमित किया जाए। अनावश्यक लाइट, एसी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद रखने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों से कहा गया है कि सरकारी बैठकों को संभव हो तो ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया जाए ताकि यात्रा और ईंधन खर्च कम किया जा सके।
इसके अलावा सरकारी वाहनों के उपयोग को भी नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। कई विभागों में वाहन उपयोग की समीक्षा शुरू कर दी गई है। माना जा रहा है कि इससे राज्य स्तर पर बड़े पैमाने पर ईंधन की बचत हो सकेगी।
वर्क फ्रॉम होम पर सरकार का फोकस
नई गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि जिन विभागों में संभव हो, वहां कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी जा सकती है। इससे दफ्तरों में बिजली की खपत कम होगी और सड़क पर वाहनों की संख्या भी घटेगी। सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हुए बिना ऊर्जा संरक्षण संभव है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकारी स्तर पर यह मॉडल सफल होता है तो निजी संस्थान भी इसे अपनाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं। कोविड काल के दौरान वर्क फ्रॉम होम मॉडल पहले ही प्रभावी साबित हो चुका है।
आम जनता से भी सहयोग की अपील
सरकार ने सिर्फ विभागों ही नहीं बल्कि आम लोगों से भी बिजली और ईंधन बचाने की अपील की है। नागरिकों से कहा गया है कि जरूरत न होने पर बिजली उपकरण बंद रखें और छोटी दूरी के लिए निजी वाहन की जगह सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
Narendra Modi भी पहले ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को लेकर लोगों से अपील कर चुके हैं। इसी दिशा में यूपी सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए बड़ा कदम
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में ऊर्जा संसाधनों पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में राज्यों द्वारा ऊर्जा बचत को लेकर बनाई जा रही नीतियां भविष्य के लिए जरूरी मानी जा रही हैं। यूपी सरकार की यह पहल प्रशासनिक खर्च कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार साबित हो सकती है।
