उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग में कथित भर्ती घोटाले की विस्तृत जांच का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को “शून्य सहनशीलता” के साथ भ्रष्टाचार के मामलों को खंगालने का निर्देश दिया है, और कहा है कि किसी भी अनियमितता को बख्शा नहीं जाएगा। जांच में 2016 में हुई एक्स-रे टेक्नीशियन भर्ती पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें चयनित उम्मीदवारों की तैनाती और वास्तविक नियुक्तियों में भारी अंतर पाया गया है।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने हर जिले में तीन सदस्यीय जांच समितियाँ गठित की हैं, जिनके सामने दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन समितियों को भर्ती प्रक्रिया के सभी चरणों — विज्ञापन से लेकर अंतिम नियुक्ति तक — की जांच करने के लिए कहा गया है। समिति के पास यह भी जिम्मेदारी होगी कि वे यह तय करें कि किसी ने कैसे सरकारी नौकरी प्राप्त की, क्या चयन सूची और वास्तविक नियुक्तियों के बीच गड़बड़ियाँ थीं, और कौन जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मियों ने इन अनियमितताओं को संभव बनाया।
भर्ती प्रक्रिया में आई कथित अनियमितताएँ
प्रारंभिक जांच से पता चला है कि कई लोगों ने सरकारी नियुक्ति प्राप्त की, जबकि वे मूल मेरिट सूची में शामिल नहीं थे। कुछ मामलों में, जो लोग नियुक्त हुए, उन्होंने वैध चयन प्रक्रिया का पालन नहीं किया और फिर भी सरकारी खजाने से वेतन प्राप्त किया। सरकारी रिकार्ड के अनुसार, जिन व्यक्तियों ने वास्तविक चयन नहीं किया था, वे सालों तक वेतन ले रहे थे और विभाग को आर्थिक नुकसान हुआ है।
हाल के मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक मामले में एक ही नाम पर छह अलग-अलग जिलों में भर्ती पाने वाले संदिग्धों की पहचान भी हुई है। बताया गया है कि उन्होंने विभिन्न फर्जी दस्तावेजों का उपयोग कर एक ही व्यक्ति के नाम से छह अलग-अलग स्थानों पर नियुक्तियाँ हासिल कर ली थी, और लंबे समय तक सैलरी प्राप्त की। इस तरह के खुलासे ने योगी आदित्यनाथ सरकार को जांच तेज करने पर मजबूर किया था।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि जांच निष्पक्ष, समयबद्ध और पूर्ण रूप से पारदर्शी हो। यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और दंडात्मक उपाय किए जाएंगे। यह कदम राज्य सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
योगी आदित्यनाथ ने दिए आगे की कार्रवाई के आदेश
जांच समितियों को यह भी पता लगाना है कि कैसे वास्तविक नियुक्तियों में चयन सूची की तुलना में अधिक लोग शामिल थे, और क्या कुछ प्रशासनिक स्तर पर भ्रष्ट सहयोग रहा। यदि अनियमितताएँ पाई जाती हैं, तो अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और विधिक कार्रवाई की संभावना है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जांच केवल 2016 तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पिछले कुछ वर्षों के भर्ती रिकार्डों को भी खंगाला जाएगा।
इस व्यापक जांच से उम्मीद की जा रही है कि चिकित्सा विभाग में भर्ती प्रणाली को सुधारने और भविष्य में भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिलेगी, जिससे योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिलेगा और सरकारी संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित होगा।
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