उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 के पहले चरण की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने इस अभियान को राज्य के समावेशी विकास और बेहतर योजनाओं की दिशा में बड़ा कदम बताया। इस बार की जनगणना कई मायनों में खास मानी जा रही है, क्योंकि देश में पहली बार डिजिटल तरीके से व्यापक डेटा संग्रह किया जाएगा।
“हमारी जनगणना, हमारा विकास” पर जोर
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सही जनगणना किसी भी सरकार की योजनाओं की नींव होती है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या, आवास, रोजगार, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा सही डेटा मिलने से सरकार को योजनाएं बनाने और जरूरतमंदों तक लाभ पहुंचाने में आसानी होगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में देश पहली बार डिजिटल जनगणना की ओर बढ़ रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और डेटा संग्रह की प्रक्रिया तेज व अधिक सटीक होगी।
पहले चरण में क्या होगा?
जनगणना 2027 के पहले चरण में “हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस” का काम किया जाएगा। इसमें घरों की संख्या, भवन की स्थिति, पानी, बिजली, शौचालय और अन्य सुविधाओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या से संबंधित विस्तृत आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।
सरकार ने नागरिकों को “सेल्फ एन्यूमरेशन” यानी स्वयं जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी है। 7 मई से 21 मई 2026 तक लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी जानकारी स्वयं भर सकेंगे। इसके बाद जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर सत्यापन और अन्य प्रक्रिया पूरी करेंगे।
यूपी में तैनात होंगे लाखों कर्मचारी
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में इस अभियान को सफल बनाने के लिए करीब 5 लाख से अधिक कर्मचारियों और पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी। राज्य के सभी 75 जिलों, हजारों गांवों और शहरों में यह प्रक्रिया चलाई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सही जनगणना से भविष्य की नीतियों, संसाधनों के वितरण और सामाजिक योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यही कारण है कि सरकार इस अभियान को केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं बल्कि “विकास का रोडमैप” बता रही है।
