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योगी आदित्यनाथ का बड़ा फैसला: स्मार्ट मीटर में प्रीपेड सिस्टम खत्म, उपभोक्ताओं को राहत

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उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। Yogi Adityanath के नेतृत्व में राज्य सरकार ने स्मार्ट मीटर से जुड़ी लगातार शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कई अहम फैसले किए हैं। खासतौर पर प्रीपेड स्मार्ट मीटर प्रणाली को लेकर उठ रही समस्याओं के बाद सरकार ने व्यवस्था में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाया है।

प्रीपेड सिस्टम खत्म, पोस्टपेड पर जोर

राज्य सरकार ने स्मार्ट मीटर के प्रीपेड सिस्टम को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब उपभोक्ताओं को पोस्टपेड बिलिंग व्यवस्था में राहत मिलेगी। यह फैसला उन शिकायतों के बाद लिया गया, जिनमें उपभोक्ताओं ने तकनीकी खामियों, अचानक बिजली कटने और गलत बिलिंग जैसी समस्याओं की बात कही थी।

सरकार का मानना है कि पोस्टपेड सिस्टम अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हित में है। इससे लोगों को बार-बार रिचार्ज कराने की परेशानी से भी छुटकारा मिलेगा।

शिकायतों पर सख्त रुख

मुख्यमंत्री ने स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हर शिकायत का तुरंत समाधान किया जाए और गलत बिलिंग की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जाए।

इसके लिए प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाने की योजना बनाई गई है, जिसमें अधिकारी घर-घर जाकर उपभोक्ताओं की समस्याएं सुनेंगे और उनका समाधान करेंगे।

घर-घर पहुंचेंगे अधिकारी

सरकार ने तय किया है कि बिजली विभाग के अधिकारी सीधे उपभोक्ताओं से संपर्क करेंगे। इस अभियान के तहत हर अधिकारी को कुछ उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।

इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर 1912 पर आने वाली शिकायतों की भी रोजाना समीक्षा की जाएगी, ताकि कोई भी शिकायत लंबित न रहे।

ओवर बिलिंग पर जांच

स्मार्ट मीटर से जुड़े ओवर बिलिंग के मामलों को लेकर भी सरकार सतर्क है। मुख्यमंत्री ने इन शिकायतों की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का स्पष्ट कहना है कि उपभोक्ताओं को सही और समय पर बिल मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी परेशानी के भुगतान कर सकें।

उपभोक्ता हित सरकार की प्राथमिकता

ऊर्जा विभाग ने भी साफ किया है कि उपभोक्ताओं की सुविधा सर्वोपरि है। सरकार का लक्ष्य बिजली सेवाओं को सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है.

इन फैसलों से लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह कदम सरकार की उस नीति को भी दर्शाता है, जिसमें जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दी जा रही है।