उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब ‘रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना’ को तेजी से लागू करने की तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत सरकारी विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाली मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे बेटियों को शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और सुरक्षित यात्रा का भी लाभ मिलेगा।
सीएम योगी ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने योजना की प्रगति की जानकारी ली। जब अधिकारियों ने बताया कि पात्रता और मेरिट से जुड़े नियम अभी पूरी तरह तय नहीं हो सके हैं, तो मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को जल्द से जल्द गाइडलाइन तैयार करने और योजना को धरातल पर उतारने के निर्देश दिए।
सीएम योगी ने साफ कहा कि योजना की प्रक्रिया पारदर्शी और सरल होनी चाहिए, ताकि योग्य छात्राओं को समय पर लाभ मिल सके। सरकार चाहती है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ बड़ी संख्या में छात्राओं तक पहुंच जाए।
पहले चरण में 45 हजार छात्राओं को लाभ
राज्य सरकार ने योजना के पहले चरण के लिए करीब 400 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। शिक्षा विभाग के अनुसार, इस बजट से लगभग 45 हजार मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दी जा सकती है। हालांकि लाभार्थियों की अंतिम संख्या शासन स्तर पर तय की जाएगी।
विभाग अभी इस बात पर विचार कर रहा है कि छात्राओं का चयन प्रथम वर्ष के अंक, अंतिम वर्ष के परिणाम या किसी अन्य मेरिट प्रणाली के आधार पर किया जाए। इसके लिए विस्तृत नियम तैयार किए जा रहे हैं।
छात्राओं की शिक्षा और सुरक्षा पर फोकस
उत्तर प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में करीब 9 लाख छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं। इनमें से मेधावी छात्राओं का चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य सिर्फ स्कूटी बांटना नहीं, बल्कि बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना भी है।
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पढ़ने वाली छात्राओं को अक्सर कॉलेज आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मुफ्त स्कूटी मिलने से उनकी यात्रा आसान होगी और वे आत्मविश्वास के साथ शिक्षा जारी रख सकेंगी। योजना को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
