उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर मूर्ति विकास योजना के लिए 407 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार का उद्देश्य प्रदेशभर में स्थापित डॉ. आंबेडकर और अन्य समाज सुधारकों की प्रतिमाओं का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और आवश्यक विकास कार्य कराना है।
सरकार का कहना है कि इस योजना के माध्यम से ऐतिहासिक और सामाजिक महत्व वाले स्थलों को बेहतर स्वरूप दिया जाएगा तथा लोगों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई जाएंगी। यह राशि अनुपूरक बजट के तहत उपलब्ध कराई गई है।
प्रतिमाओं पर लगेंगे शेड, होगा सौंदर्यीकरण
योजना के तहत डॉ. आंबेडकर की प्रतिमाओं के ऊपर सुरक्षात्मक शेड (छतरी) लगाने, आसपास के परिसर का सौंदर्यीकरण करने, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, बैठने की व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। सरकार चाहती है कि प्रतिमाएं मौसम की मार से सुरक्षित रहें और इन स्थलों पर आने वाले लोगों को बेहतर वातावरण मिले।
इसके अलावा जिन स्थानों पर प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त हैं या रखरखाव की आवश्यकता है, वहां मरम्मत और पुनर्विकास का कार्य भी कराया जाएगा।
सभी विधानसभा क्षेत्रों में होगा विकास कार्य
सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से प्रतिमाओं और स्मारकों के विकास का कार्य किया जाएगा। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कई स्थलों को चिन्हित कर उनके विकास और रखरखाव की व्यवस्था की जाएगी।
सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल प्रतिमाओं का संरक्षण नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और महापुरुषों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। अधिकारियों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
सामाजिक विरासत के संरक्षण पर सरकार का जोर
सरकार का मानना है कि डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित अन्य समाज सुधारकों की विरासत को सुरक्षित रखना समाज के लिए महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से इस योजना को वित्तीय मजबूती प्रदान की गई है। आने वाले समय में विभिन्न जिलों में विकास कार्यों की निगरानी भी की जाएगी ताकि निर्धारित समय सीमा में परियोजनाएं पूरी हो सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे प्रदेशभर में स्थित प्रतिमाओं और स्मारकों का स्वरूप बेहतर होगा तथा सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को भी नई दिशा मिलेगी। सरकार का कहना है कि यह पहल केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि नियमित रखरखाव और जनसुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
