ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गोंडा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर कई बयान दिए। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े हालिया विवादों और ट्रस्ट के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की आवश्यकता बताई।
शंकराचार्य ने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के संचालन में जवाबदेही और विश्वास बनाए रखना बेहद जरूरी है। उनके इन बयानों के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।
राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संस्थानों का संचालन पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
उनका कहना था कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की शंका की स्थिति नहीं बननी चाहिए। उन्होंने धार्मिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने के लिए जवाबदेही को आवश्यक बताया।
सरकार की नीतियों पर भी जताई आपत्ति
अपने संबोधन में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश सरकार की कुछ नीतियों और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि धर्म और शासन से जुड़े विषयों पर गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिए जाने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक परंपराओं और संत समाज की भावनाओं का सम्मान किया जाना आवश्यक है। उनके वक्तव्य में विभिन्न मुद्दों पर सरकार से पुनर्विचार की अपील भी शामिल रही।
कानून और संवाद के माध्यम से समाधान की अपील
कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक विवादों का समाधान संविधान, कानून और आपसी संवाद के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने लोगों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
उन्होंने विश्वास जताया कि पारदर्शिता और संवाद से समाज में विश्वास मजबूत होगा तथा धार्मिक संस्थाओं की गरिमा भी बनी रहेगी। कार्यक्रम में मौजूद संतों और श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया।
