उत्तर प्रदेश के संभल जिले में एक पुलिस अधिकारी के बयान के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। दरअसल, संभल के सर्किल ऑफिसर (सीओ) कुलदीप कुमार ने एक बैठक के दौरान कहा था कि अगर किसी को किसी दूसरे देश, खासकर ईरान, का इतना समर्थन करना है तो वह वहां जाकर उसका समर्थन कर सकता है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
यह टिप्पणी एक पीस कमेटी की बैठक के दौरान दी गई थी, जहां कानून-व्यवस्था और सामाजिक माहौल को लेकर चर्चा हो रही थी। सीओ ने कहा कि भारत में रहकर किसी विदेशी मुद्दे को लेकर माहौल खराब करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता है।
मनोज तिवारी ने लोकतंत्र का हवाला दिया
इस पूरे मामले पर बीजेपी सांसद मनोज तिवारी की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में अलग-अलग विचारधाराओं का होना स्वाभाविक है और राजनीतिक समर्थक अक्सर अपनी विचारधारा के समर्थन में सड़कों पर आते हैं।
मनोज तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का टकराव एक सामान्य प्रक्रिया है। उनके अनुसार, विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के समर्थक अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन या विरोध करते हैं और इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में राजनीतिक बहस होना स्वाभाविक है।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
इस विवाद पर विपक्षी नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने सीओ के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि पीस कमेटी की बैठकों का उद्देश्य समाज में शांति और भाईचारा बढ़ाना होना चाहिए, न कि विवादित बयान देना।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी को किसी देश का समर्थन करने पर वहां जाने की सलाह दी जा रही है, तो क्या अन्य देशों के समर्थकों को भी यही सलाह दी जाएगी। उनके अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर संतुलित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए।
कानून व्यवस्था बनाए रखने पर प्रशासन का जोर
प्रशासन की ओर से कहा गया है कि उनका मुख्य उद्देश्य जिले में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति या समूह को अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के नाम पर स्थानीय स्तर पर तनाव पैदा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
कुल मिलाकर, संभल सीओ के बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
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